बाल विवाह और गरीबी को हराकर रामलाल भोई ने पांचवें प्रयास में पास की नीट परीक्षा

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Chittorgarh: ‘मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है’—यह पंक्तियां राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के घोसुंडा गांव में रहने वाले रामलाल भोई पर पूरी तरह सटीक बैठती हैं। विषम परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने नीट जैसी कठिन परीक्षा पास कर सफलता की नई मिसाल कायम की है।

रामलाल की जीवन यात्रा चुनौतियों से भरी रही है। वर्ष 2023 में उन्होंने कई प्रयासों के बाद नीट में सफलता हासिल की। महज 11 साल की उम्र में बाल विवाह होने और अत्यधिक आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने डॉक्टर बनने के सपने से कभी समझौता नहीं किया।

कच्चे मकान में बचपन और पढ़ाई के लिए भारी संघर्ष

रामलाल का परिवार बेड़च नदी के किनारे एक कच्चे मकान में रहता है, जहां बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी सीमित हैं। उनके पिता मजदूरी करते हैं और मां पशुओं का चारा बेचकर घर चलाने में मदद करती हैं। पांच भाई-बहनों में शामिल रामलाल ने कठिन हालात में भी पढ़ाई जारी रखी।

छठी कक्षा में पढ़ाई के दौरान ही उनका बाल विवाह कर दिया गया था। समाज की रूढ़िवादी सोच और पारिवारिक दबाव के कारण 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ देने की नौबत आ गई थी। हालांकि, पिता के विरोध और डांट के बावजूद रामलाल ने हार नहीं मानी और आगे पढ़ने की जिद पर अड़े रहे।

टीचर्स की सलाह पर कोटा पहुंचे और लगातार किए प्रयास

गांव के स्कूल से 10वीं पास करने के बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए उदयपुर गए। वहां शिक्षकों से उन्हें बायोलॉजी विषय और नीट परीक्षा के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने अंबेडकर छात्रावास में रहकर 12वीं की पढ़ाई पूरी की और खुद ही तैयारी शुरू कर दी।

शुरुआती प्रयासों में कम अंक आने के बाद शिक्षकों की सलाह पर उनके पिता ने कर्ज लेकर उन्हें कोटा भेजा। लगातार मिली असफलताओं से सीख लेते हुए रामलाल ने आखिरकार 2023 में अपने पांचवें प्रयास में नीट परीक्षा पास कर अपना और परिवार का सपना सच कर दिखाया।

Desh Raj
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