Jaipur: सपनों की कोई उम्र नहीं होती और न ही परिस्थितियां रास्ते का रोड़ा बन सकती हैं। अगर हौसला मजबूत हो, तो चारदीवारी से निकलकर भी सफलता का नया इतिहास लिखा जा सकता है। राजस्थान पुलिस में डीएसपी के पद पर तैनात अंजू यादव की जीवन यात्रा इसी विश्वास की मिसाल है।
एक समय ऐसा था जब तैयारी शुरू करने से पहले अंजू यादव को आरएएस का फुल फॉर्म भी मालूम नहीं था। कठिन परिस्थितियों में आंखों के आंसू सूख चुके थे, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने पहले ही प्रयास में यह बड़ी सफलता हासिल कर ली।
हरियाणा के किसान परिवार से निकलकर संभाली डीएसपी की कुर्सी
हरियाणा के एक साधारण किसान परिवार से आने वाली अंजू यादव आज राजस्थान पुलिस सेवा में पुलिस उपाधीक्षक के रूप में कार्यरत हैं। पासिंग आउट परेड के बाद उन्होंने आधिकारिक रूप से अपनी जिम्मेदारी संभाली। आरएएस परीक्षा 2021 में उन्होंने विधवा श्रेणी के तहत 1725वीं रैंक हासिल की थी।
अंजू यादव का जन्म वर्ष 1988 में हरियाणा के धौलेड़ा गांव में हुआ था। उनके पिता लालाराम यादव किसान हैं और मां सुशीला देवी गृहणी हैं। अंजू की शुरुआती पढ़ाई गांव के ही सरकारी स्कूल से हुई। 12वीं के बाद उन्होंने डिस्टेंस एजुकेशन के माध्यम से सरकारी कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की।
संघर्षपूर्ण सफर और तीन सरकारी नौकरियों की सफलता
वर्ष 2009 में 21 साल की उम्र में उनकी शादी राजस्थान के गंडाला गांव में हुई। मां बनने के बाद उन्होंने आगे बढ़ने की सोची, लेकिन ससुराल से सहयोग न मिलने पर वह मायके लौट आईं। मायके में रहकर पिता के सहयोग से उन्होंने 2016 में नवोदय विद्यालय और बाद में दिल्ली के सरकारी स्कूल में बतौर शिक्षिका सेवाएं दीं।
वर्ष 2021 में बीमारी के कारण उनके पति नित्यानंद का निधन हो गया। इस गहरे दुख के बीच भी उन्होंने खुद को संभाला और उसी साल निकले आरएएस परीक्षा का फॉर्म भरा। पति को खोने के गम के बावजूद उन्होंने प्रशासनिक सेवा की जमकर तैयारी की और पहले प्रयास में डीएसपी बनकर मिसाल कायम की।