New Delhi News: 8वें वेतन आयोग को लेकर देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच सुगबुगाहट तेज हो गई है। इसी बीच सबसे बड़े कर्मचारी संगठन नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने सरकार के सामने वेतन संरचना को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है।
कर्मचारी संगठन ने वेतन संरचना में सुधार के लिए पे-लेवल को आपस में मर्ज करने का सुझाव दिया है। संगठन का मानना है कि कई मौजूदा पे-लेवल में वेतन का अंतर बहुत कम है, लेकिन पद और विसंगतियों के कारण कर्मचारियों में असंतोष रहता है। इससे प्रमोशन की रफ्तार भी धीमी होती है।
वेतन संरचना को सरल और पारदर्शी बनाने की मांग
एनसी-जेसीएम ने मांग की है कि मौजूदा पे मैट्रिक्स को सरल बनाया जाए। प्रस्ताव के तहत लेवल-2 और 3, लेवल-4 और 5, लेवल-7 और 8 तथा लेवल-9 और 10 को एक संयुक्त पे-स्केल में बदला जाना चाहिए। संगठन का तर्क है कि इन लेवल्स के कर्मचारियों का काम लगभग एक जैसा ही होता है।
अलग-अलग पे-लेवल होने से कर्मचारियों के बीच असमानता पैदा होती है। इसके अलावा संगठन ने मांग की है कि केंद्रीय सचिवालय, रेलवे और रक्षा जैसे विभागों में सालों से लेवल-5 पर अटके ग्रुप-सी कर्मचारियों को एक विशेष प्रावधान के तहत सीधे लेवल-6 में अपग्रेड किया जाए, ताकि उनकी करियर ग्रोथ बेहतर हो सके।
बेसिक सैलरी और पेंशन में भी बड़े बदलाव की डिमांड
कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम बेसिक वेतन को बढ़ाकर ₹69,000 करने और सालाना 3% वेतन वृद्धि (Increment) को 6% करने की भी वकालत की है। इसके साथ ही महंगाई आधारित वेतन मॉडल लागू करने और नई वेतन संरचना के अनुसार पेंशन व्यवस्था में भी बड़े बदलावों की डिमांड सरकार के सामने रखी गई है।
8वें वेतन आयोग का गठन नवंबर 2025 में हुआ था, जो सुझाव लेने की प्रक्रिया पूरी कर चुका है। आयोग फरवरी या अप्रैल 2027 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप सकता है। सरकार की मंजूरी के बाद इन सिफारिशों को लागू होने में समय लगेगा, जिससे इसका पूरा लाभ कर्मचारियों को 2029 या 2030 तक मिलने की उम्मीद है।