Kangra News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने पठानकोट-मंडी फोरलेन परियोजना के निर्माण में आ रहे अवरोधों पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने जिला कांगड़ा के शाहपुर में फोरलेन की जद में आए एक भवन को खाली करने का आदेश दिया है। कब्जाधारियों को परिसर खाली करने के लिए तीन दिन का अल्टीमेटम दिया गया है।
मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने इस मामले पर सुनवाई की। अदालत ने स्वत: संज्ञान के तहत दर्ज जनहित याचिका पर यह कड़ा निर्देश जारी किया है। दरअसल, शाहपुर में एक चिह्नित भवन को खाली न करने से राष्ट्रीय राजमार्ग का काम प्रभावित हो रहा था।
कब्जे के कारण रुका हुआ था ध्वस्तीकरण का काम
अदालत के संज्ञान में लाया गया कि संबंधित भवन पर पहले ही निशान लगाए जा चुके हैं। इसके बावजूद प्रतिवादी आर्चित, अर्पित और राजेश कुमारी ने पहली मंजिल पर कब्जा बनाए रखा है। इस कब्जे के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन की टीम भवन को गिरा नहीं पा रही थी।
हाई कोर्ट ने इस स्थिति पर गहरी नाराजगी जताई है। खंडपीठ ने आदेश दिया कि प्रशासन चिह्नित हिस्से को तुरंत ध्वस्त करे। सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ किया कि प्रभावितों के लिए 3.46 करोड़ रुपये से अधिक की मुआवजा राशि पहले ही जमा कराई जा चुकी है। अब केवल राशि का बंटवारा होना बाकी है।
पंद्रह दिनों के भीतर सरकार लेगी कड़ा एक्शन
अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून के तहत भूमि का मालिकाना हक राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का हो चुका है। हाई कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि यदि प्रतिवादी 15 दिनों में आदेश का पालन नहीं करते, तो सरकार कानूनी कार्रवाई करे। इस मामले की अगली सुनवाई अब 25 अगस्त को होगी।