Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को गति देने के लिए कंप्रेहेंसिव हिमाचल इंटीग्रेटेड कमर्शियल पोल्ट्री स्कीम शुरू की है। अगले पांच वर्षों में प्रदेश भर में 1000 व्यावसायिक ब्रायलर यूनिट स्थापित की जाएंगी। इस कदम से अन्य राज्यों पर चिकन की निर्भरता घटेगी और स्थानीय युवाओं को काम मिलेगा।
परियोजना पर खर्च होंगे 61.95 करोड़ रुपये
पशुपालन विभाग इस पूरी योजना पर 61.95 करोड़ रुपये खर्च करेगा। पहले वर्ष में 50 यूनिट लगाने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत किसानों, ग्रामीण युवाओं, महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और एफपीओ को जोड़ा जाएगा। पूंजी लागत पर 30 प्रतिशत बैक-एंड सब्सिडी के साथ अधिकतम 10.35 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी।
बैंक ऋण पर तीन प्रतिशत वार्षिक ब्याज राहत भी दी जाएगी, जिससे बड़ा निवेश आसान हो सके। यूनिट्स को तीन श्रेणियों में बांटा गया है, जिसमें 3000 से 10 हजार से अधिक ब्रायलर पक्षी रखे जा सकेंगे। पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार के अनुसार, इससे गांवों में ही व्यावसायिक अवसर पैदा होंगे।
इंटीग्रेटर मॉडल से दूर होगी बाजार की चिंता
पोल्ट्री फार्मिंग के लिए विभाग ने इंटीग्रेटर आधारित मॉडल तैयार किया है। पंजीकृत कंपनियां किसानों को एक दिन के चूजे, दाना, दवाइयां और जरूरी टीके उपलब्ध कराएंगी। पक्षी तैयार होने के बाद कंपनी उन्हें सीधे खरीदेगी, जिससे किसानों को बाजार तलाशने की परेशानी से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी।
विभाग योजना में मुख्य रूप से सुविधाकर्ता और क्रियान्वयन एजेंसी के रूप में कार्य करेगा। किसी भी व्यावसायिक समझौते में विभाग सीधा पक्षकार नहीं बनेगा। किसानों की सुविधा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विभाग एक से अधिक इंटीग्रेटर कंपनियों को अपने पैनल में सूचीबद्ध करने की तैयारी कर रहा है।