Shimla News: हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मॉनसून आपदा राहत, अंबेडकर भवन पुनर्निर्माण और गुज्जर पहचान से जुड़े कई मुद्दे गूंजे। राज्य के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने केंद्र सरकार पर आपदा कोष की बकाया राशि न देने का गंभीर आरोप लगाया। वहीं अन्य मंत्रियों ने विकास कार्यों और प्रशासनिक रिपोर्टों पर स्थिति स्पष्ट की।
राजस्व मंत्री ने विधानसभा में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश के वर्षा और बाढ़ पीड़ितों के लिए 1,500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की थी। हालांकि, राज्य सरकार को अभी तक इस राहत पैकेज में से एक भी रुपया प्राप्त नहीं हुआ है। यह मुद्दा प्रश्नकाल में काफी गरमाया रहा।
शाहपुर विधानसभा के बोह क्षेत्र में मॉनसून 2026 की प्राकृतिक आपदा से 4.79 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ था। इससे 19 परिवार पूरी तरह बेघर होकर स्कूल में शरण लेने को मजबूर हो गए। राज्य सरकार ने प्रभावितों को 26 लाख रुपये आवंटित किए हैं और मुख्यमंत्री ने विशेष पैकेज भी घोषित किया है।
विशेष राहत पैकेज के तहत पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए मकानों के पुनर्निर्माण के लिए प्रभावित परिवारों को 8 लाख रुपये की वित्तीय मदद दी जाएगी। राजस्व मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार बेघर हुए परिवारों को नया घर बनाने में हर संभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है और पुनर्वास कार्य जारी हैं।
रोहड़ू में अंबेडकर भवन निर्माण के लिए सरकार ने 40 लाख रुपये जारी करने की अनुमति दी है। कैबिनेट मंत्री कर्नल धनी राम शांडिल ने बताया कि रामपुर, कुमारसैन, चुराह और डलहौजी में काम न होने से यह फंड बचा था। कोली समाज ने इसके लिए 43 लाख रुपये का एस्टीमेट भेजा है।
अंबेडकर भवन के पुराने ढांचे के ध्वस्तीकरण और छूट राशि को लेकर लोक निर्माण विभाग रोहड़ू से विरोधाभासी रिपोर्ट मिली है। मंत्री ने कहा कि पीडब्ल्यूडी से स्पष्ट और संशोधित रिपोर्ट मिलने के तुरंत बाद इस प्रोजेक्ट को अंतिम प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी के लिए सरकार के पास भेज दिया जाएगा।
विधानसभा में ‘गुज्जर’ शब्द की जगह ‘हिंदू गुज्जर’ लिखे जाने का मुद्दा भी उठा। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने स्पष्ट किया कि सरकार ने इस संबंध में कोई अधिसूचना जारी नहीं की है। जिला और तहसील स्तर पर आ रही विसंगतियों को देखते हुए पूरे प्रदेश से डेटा एकत्र किया जा रहा है।