Mandi News: पठानकोट-मंडी फोरलेन निर्माण से प्रभावित भवन मालिकों को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में भवन का आधा हिस्सा अधिग्रहित हुआ है, वहां शेष बचे हिस्से को हुए नुकसान का भी नियमानुसार आकलन कर उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही, आवश्यक कार्रवाई पूरी होने तक संबंधित व्यावसायिक भवन को तोड़ने या ध्वस्त करने पर रोक लगा दी गई है।
समिति को दिए गए उचित कार्रवाई के निर्देश
फोरलेन समन्वय समिति के सचिव महेंद्र गुलेरिया ने जानकारी दी कि पांच नवंबर को पद्धर से बिजनी के मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह निर्देश दिए। न्यायालय ने प्रदेश सरकार द्वारा उपायुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति को मामले में उचित कार्रवाई करने को कहा है। याचिकाकर्ता एक सप्ताह के भीतर अपना प्रतिवेदन समिति के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं, जबकि समिति को अगले दो सप्ताह के भीतर उस पर अपना निर्णय लेना होगा।
भवन की सुरक्षा और उपयोगिता पर पड़ता है असर
समिति ने बताया कि फोरलेन निर्माण के दौरान कई भवनों का कुछ हिस्सा अधिग्रहित होने से शेष बचे हिस्से की उपयोगिता और सुरक्षा दोनों प्रभावित होती हैं। ऐसे में प्रभावित मालिकों को केवल अधिग्रहित हिस्से का मुआवजा मिलने से पूरे नुकसान की भरपाई नहीं हो पाती है। फोरलेन समन्वय समिति ने इस आदेश को प्रभावित परिवारों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है और प्रशासन से आग्रह किया है कि अन्य प्रभावितों की शिकायतों पर भी इसी तरह निष्पक्षता से विचार किया जाए।