हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सरकार की संशोधित वेतन और पेंशन बकाया की चरणबद्ध नीति रद्द, दो किस्तों में भुगतान के निर्देश

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के संशोधित वेतन और पेंशन बकाया के चरणबद्ध भुगतान की नीति को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। अदालत ने अपने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया है कि वित्तीय बाधाएं कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के कानूनी रूप से वैध मौद्रिक अधिकारों को रोकने का आधार नहीं हो सकती हैं।

हाईकोर्ट की खंडपीठ का महत्वपूर्ण फैसला और नियम 13 खारिज

न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने 31 अक्टूबर को सुनाए गए अपने फैसले में हिमाचल प्रदेश सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2022 के उन प्रमुख प्रावधानों को निरस्त कर दिया, जो सरकार को इन भुगतानों को टालने की छूट देते थे। विशेष रूप से नियम 13, जो भुगतान की समय-सीमा पर असीमित विवेक प्रदान करता था, उसे निष्क्रिय घोषित कर दिया गया है। इसके अलावा, संशोधित पेंशन, पारिवारिक पेंशन, ग्रेच्युटी, कम्यूटेड पेंशन और अवकाश नकदीकरण के भुगतान में देरी के प्रावधानों को भी अदालत ने खारिज कर दिया है।

मुख्य याचिकाकर्ता के लिए भुगतान की समय-सीमा और ब्याज का प्रावधान

अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह मुख्य याचिकाकर्ता को संशोधित वेतन के सभी बकाए और स्वीकार्य सेवानिवृत्ति लाभ दो समान किस्तों में जारी करे। पहली किस्त 15 दिसंबर, 2026 तक और दूसरी किस्त 28 फरवरी, 2027 तक देनी होगी। इसमें पेंशन, ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण जैसी सभी राशियां शामिल हैं।

इसके साथ ही, अदालत ने 1 जून, 2022 से वास्तविक भुगतान तक छह प्रतिशत वार्षिक की दर से साधारण ब्याज देने का भी आदेश दिया है। हालांकि, स्पष्ट किया गया है कि जिन कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने 30 अक्टूबर, 2026 तक अदालत में याचिका दायर नहीं की थी, वे अपने मूल बकाया लाभों के तो हकदार होंगे, लेकिन इस छह प्रतिशत ब्याज का लाभ उन्हें नहीं मिलेगा।

वित्तीय कठिनाइयों का तर्क खारिज

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपने चरणबद्ध भुगतान के निर्णय का बचाव करते हुए वित्तीय कठिनाइयों और केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान रोके जाने का हवाला दिया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस तर्क को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि एक बार जब संशोधित वेतन नियम पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू कर दिए जाते हैं, तो सरकार मनमाने ढंग से भुगतान को रोक या टाल नहीं सकती है। अदालत ने जोर देकर कहा कि अर्जित मौद्रिक बकाये को वित्तीय तंगी का हवाला देकर समाप्त नहीं किया जा सकता है।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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