Kathmandu News: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह 22 नवंबर 2026 से अपनी तीन दिवसीय आधिकारिक भारत यात्रा पर आएंगे। मार्च 2026 में पद संभालने के बाद यह उनकी पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा होगी। इस यात्रा के दौरान नेपाल रसुवा-भोटेकोशी कॉरिडोर में आई बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण और पुनर्वास कार्यों के लिए भारत से 2 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता का प्रस्ताव रखेगा।
नेपाल में राजनीतिक बदलाव और जनआंदोलन के बाद सत्ता संभालने वाले प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह (बालेन शाह) 22 नवंबर 2026 से भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर आ रहे हैं। मार्च 2026 में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद किसी भी देश के साथ यह उनकी पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों के साथ-साथ आर्थिक सहयोग पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।
बाढ़ पुनर्निर्माण के लिए 2 अरब डॉलर की मदद की मांग
नेपाली अखबार ‘द काठमांडु पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरे में नेपाल का मुख्य जोर देश में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण कार्यों के लिए वित्तीय मदद जुटाने पर रहेगा। नेपाल सरकार ने 26 अगस्त को रसुवा-भोटेकोशी कॉरिडोर क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदा के चलते हुए व्यापक नुकसान से उबरने के लिए भारत से औपचारिक रूप से 2 अरब डॉलर का सहायता पैकेज मांगा है।
इस 2 अरब डॉलर की प्रस्तावित आर्थिक सहायता के प्रारूप में मुख्य रूप से तीन हिस्से शामिल हैं:
- 1 अरब डॉलर रियायती ब्याज दर पर कर्ज के रूप में।
- 50 करोड़ डॉलर का सीधा सरकारी अनुदान (ग्रांट)।
- 50 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त राशि, जिसे पुनर्निर्माण और प्रभावितों के पुनर्वास के लिए अनुदान के रूप में दिए जाने की उम्मीद है।
सामरिक सुरक्षा और क्षेत्रीय समीकरण
यह द्विपक्षीय यात्रा रणनीतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत और नेपाल आपस में लगभग 1,751 किलोमीटर लंबी खुली सीमा साझा करते हैं, जिससे दोनों देशों की आंतरिक सुरक्षा, व्यापार और सीमा प्रबंधन एक-दूसरे के सहयोग पर निर्भर करते हैं।
दूसरी ओर, नेपाल में चीन की बढ़ती आर्थिक और बुनियादी ढांचे से जुड़ी गतिविधियों को लेकर भी भारत की नजरें इस दौरे पर रहेंगी। चीन लगातार नेपाल के विभिन्न हिस्सों में सड़क, रेलवे और अन्य बुनियादी सेवाओं के प्रोजेक्ट्स में निवेश बढ़ा रहा है। ऐसे में बालेन शाह के इस भारत दौरे के दौरान सीमावर्ती सुरक्षा, रणनीतिक हितों और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी को संतुलित करने पर भी चर्चा हो सकती है।