Shimla News: देश के सेब बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। शुरुआती सीजन में हमेशा दबदबा रखने वाले हिमाचल प्रदेश के सेब को इस बार कश्मीर से कड़ी टक्कर मिली है। आधुनिक हाई-डेंसिटी खेती, बेहतर गुणवत्ता और सरकारी समर्थन के दम पर कश्मीरी सेब ने पारंपरिक बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, जिससे हिमाचल के बागवानों की चिंता बढ़ गई है।
उत्पादन में कश्मीर आगे, हिमाचल में आई भारी गिरावट
भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में जम्मू-कश्मीर में 20.45 लाख मीट्रिक टन सेब का उत्पादन हुआ, जबकि हिमाचल प्रदेश में यह आंकड़ा 5.83 लाख मीट्रिक टन दर्ज किया गया। इस सीजन में मौसम की मार के चलते हिमाचल की स्थिति और खराब हो गई है, जहां केवल 1.37 करोड़ पेटियां ही मंडियों में पहुंच पाईं, जो पिछले साल की तुलना में आधे से भी कम हैं।
हाई-डेंसिटी तकनीक और बेहतर सुविधाओं का असर
कश्मीर के शोपियां, बारामूला और अनंतनाग जैसे इलाकों में किसानों ने पारंपरिक खेती छोड़कर हाई-डेंसिटी (सघन बागवानी) तकनीक अपना ली है। सरकारी सब्सिडी और कोल्ड स्टोरेज के विस्तार से कश्मीरी सेब कम कीमत पर बेहतर गुणवत्ता के साथ मंडियों में पहुंच रहे हैं। इसके विपरीत, हिमाचल के बागवान पुराने पेड़ों और जलवायु परिवर्तन के कारण लगातार कम उत्पादन और मौसम की मार से जूझ रहे हैं।