हिमाचल में आपदा पर रिपोर्ट: अनियोजित निर्माण और पर्यटन दबाव ने बढ़ाई तबाही, विशेषज्ञों ने दी विकास मॉडल बदलने की चेतावनी

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2023 और 2025 में आई भीषण प्राकृतिक त्रासदियों पर एक संयुक्त रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट ने राज्य के विकास मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि यह तबाही केवल प्रकृति का प्रकोप नहीं, बल्कि अनियोजित निर्माण और पर्यटन दबाव का नतीजा है।

अनियोजित शहरीकरण और कटाई ने बढ़ाई तबाही

डा. मनमोहन सिंह हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक संस्थान और आपदा प्रबंधन की संयुक्त रिपोर्ट में कई खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अनियोजित शहरीकरण, ढलानों की अवैज्ञानिक कटाई और बुनियादी ढांचे के अनियंत्रित निर्माण ने आपदा की तीव्रता बढ़ाई। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि विकास की दिशा न बदलने पर भविष्य में अधिक खतरा होगा।

बदलते मौसम चक्र और पिघलते ग्लेशियर की चुनौती

पश्चिम हिमालय का मौसम चक्र तेजी से बदला है। अब कम समय में अत्यधिक बारिश, बादल फटने और अचानक बाढ़ की घटनाएं आम हो गई हैं। तेजी से पिघलते ग्लेशियरों से झीलों का आकार बढ़ रहा है, जिससे ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड का खतरा बना है। यह निचले इलाकों के शहरों और गांवों के लिए बड़ी चुनौती है।

पर्यावरण-अनुकूल विकास और ग्रीन टैक्स की सिफारिश

विशेषज्ञों ने बड़े फोरलेन और कंक्रीट निर्माण के बजाय ‘स्मॉल इज ब्यूटीफुल’ की अवधारणा अपनाने की सिफारिश की है। पारंपरिक काष्ठकुणी वास्तुकला, बायो-इंजीनियरिंग तकनीक और शिमला-मनाली जैसे स्थानों में पर्यटकों की संख्या सीमित करने का सुझाव दिया है। इसके साथ ही ग्रीन टैक्स जैसे प्रभावी उपायों को लागू करने की बात भी कही गई है।

प्रदेश के सबसे संवेदनशील जिलों के आंकड़े

रिपोर्ट के अनुसार कांगड़ा का 98.6 प्रतिशत और मंडी का 97.4 प्रतिशत क्षेत्र अत्यधिक भूकंपीय संवेदनशील क्षेत्र में है। हमीरपुर का 90.9 प्रतिशत, चंबा का 53.2 प्रतिशत और कुल्लू का 53.1 प्रतिशत भूभाग उच्च खतरे वाले दायरे में आता है। ये जिले भूकंप और भूस्खलन की दृष्टि से सबसे अधिक प्रभावित और संवेदनशील माने गए हैं।

आपदा प्रबंधन के विशेष सचिव व निदेशक पुष्पेंद्र राणा ने कहा, “प्रदेश में 2023 और 2025 के दौरान भारी तबाही हुई। इस संबंध में रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसमें अनियोजित निर्माण और पर्यटन दबाव सामने आया है। वैज्ञानिक और परंपरागत तकनीकों का इस्तेमाल कर बचाव के सुझाव दिए गए हैं।”

Right News Desk
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