Shimla News: हिमाचल प्रदेश में गर्मी और मॉनसून के दौरान सांप के काटने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। समय पर इलाज मिलने से मरीज की जान आसानी से बचाई जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अंधविश्वास या देशी तरीकों में वक्त न गंवाएं और तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल जाएं।
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल एक बड़े अस्पताल के मेडिसिन डिपार्टमेंट में 192 और पीडियाट्रिक्स यानी बाल रोग विभाग में 71 मरीज भर्ती हुए। इस तरह कुल 263 सर्पदंश के मामले सामने आए। इलाज में देरी के कारण दो मरीजों की मौत हो गई, क्योंकि उन्होंने समय पर डॉक्टरी सहायता नहीं ली थी।
टांडा मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने साफ कहा है कि सर्पदंश के बाद बिल्कुल भी देरी न करें। नीम-हकीमों या पारंपरिक तरीकों के चक्कर में पड़ना जानलेवा साबित हो सकता है। मरीज को बिना घबराए और सुरक्षित तरीके से नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाएं, जहां सभी सुविधाएं मौजूद हैं।
राज्य सरकार ने सभी प्राथमिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, सिविल अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध कराया है। इस दवा की मदद से मरीजों को सही समय पर मुफ्त और सटीक इलाज दिया जा रहा है। इससे गंभीर जटिलताओं और मौतों को रोकने में काफी मदद मिल रही है।
सांप के काटने का संदेह होने पर पीड़ित व्यक्ति को शांत रखें और प्रभावित अंग को बिल्कुल हिलने-डुलने न दें। घाव को काटने या मुंह से जहर चूसने की गलती कभी न करें। जनता से अपील है कि वे सतर्क रहें और तत्काल चिकित्सा सहायता प्राप्त करें।