Shimla News: हिमाचल प्रदेश में भूकंपीय गतिविधियों की त्वरित निगरानी के लिए वैज्ञानिक उपकरणों का बड़ा नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। नेशनल इंस्ट्रूमेंटेशन नेटवर्क प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश भर में लगभग सौ उपकरण लगाए जाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य भूकंप आने की स्थिति में तुरंत सटीक सूचनाएं उपलब्ध कराना है।
सात जिलों में दस उपकरणों के साथ पहले चरण की शुरुआत
शुरुआती चरण में बिलासपुर, चम्बा, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, शिमला और सोलन जिलों में दस विशेष उपकरण लगाए जा रहे हैं। यह महत्वपूर्ण कार्य राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र और हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के संयुक्त सहयोग से हो रहा है। चिन्हित जगहों पर वैज्ञानिक तकनीक से निगरानी तंत्र मजबूत बनेगा।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के विशेष सचिव पुष्पेंद्र राणा ने बताया कि बाकी चिन्हित स्थानों पर भी उपकरण लगाने की कागजी प्रक्रिया जारी है। जल्द ही सभी प्रमुख जगहों पर सेंसर स्थापित कर दिए जाएंगे। इस आधुनिक तकनीक से जमीन के भीतर होने वाली हलचल का रिकॉर्ड आसानी से मिल सकेगा।
साढ़े तीन साल में 67 झटके, चम्बा रहा सबसे संवेदनशील
सरकारी आंकड़ों के अनुसार हिमाचल में पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान भूकंप के 67 झटके दर्ज किए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा भूकंपीय घटनाएं चम्बा जिले में सामने आईं। अधिकतर झटकों की तीव्रता रिएक्टर स्केल पर तीन से चार के बीच रही, जिससे किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं थी।
इस पूरी अवधि में सबसे तेज झटका चार अप्रैल 2024 को चम्बा में महसूस हुआ था, जिसकी तीव्रता 5.3 दर्ज की गई थी। इसके अलावा पांच जून 2026 को भी चम्बा जिले में पांच तीव्रता का भूकंप आया। लगातार बढ़ रही इन घटनाओं को देखते हुए निगरानी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है।