Bhubaneswar News: ओडिशा सरकार ने भगवान जगन्नाथ की उन जमीनों को वापस पाने और नियमित करने की बड़ी योजना बनाई है, जिन पर वर्षों से अवैध कब्जा है। राज्य ने श्री जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी 60,426 एकड़ से अधिक जमीन की पहचान की है।
राजस्व मामलों के त्वरित निपटारे के निर्देश जारी
यह जमीन ओडिशा के अलावा छह अन्य राज्यों में फैली हुई है, जिसमें लगभग 395 एकड़ जमीन राज्य से बाहर है। राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग ने मंदिर प्रशासन द्वारा दायर 11,675 राजस्व मामलों के शीघ्र निपटारे का निर्देश दिया है।
अपर मुख्य सचिव अरबिंद कुमार पाधी ने खोरधा, पूरी, बालासोर समेत कई जिलों के अधिकारियों को पेंडिंग केस जल्द निपटाने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर संपत्ति की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
पेनल्टी देकर मालिकाना हक देने की तैयारी
सरकार उन मामलों के लिए व्यावहारिक समाधान तलाश रही है, जहां जमीन कई सालों से निजी कब्जे में है। प्रस्तावित योजना के तहत, तय जुर्माना और शुल्क का भुगतान करने पर काबिज लोगों को वैध मालिकाना हक दिया जा सकता है।
वर्षों से बनी बस्तियों को पूरी तरह खाली कराना व्यावहारिक रूप से कठिन है। इसलिए कानूनी प्रक्रिया के जरिए जमीन को मोनेटाइज करने का विचार बनाया गया है। भुगतान के बाद जमीन आधिकारिक रूप से रहने वालों के नाम दर्ज कर दी जाएगी।
10 हजार करोड़ का कॉर्पस फंड बनाने का लक्ष्य
जमीन की बिक्री या सेटलमेंट से प्राप्त राशि से 10,000 करोड़ रुपए का कॉर्पस फंड तैयार करने की योजना है। अधिकारियों के मुताबिक, यह फंड मंदिर और उससे संबद्ध संस्थाओं के दीर्घकालिक रखरखाव के लिए वित्तीय आधार प्रदान करेगा।
रिकॉर्ड के अनुसार, मंदिर की संपत्ति ओडिशा के 24 जिलों और छह अन्य राज्यों में फैली है। इसमें सबसे ज्यादा 323 एकड़ जमीन पश्चिम बंगाल में है। पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक विशेष लैंड सेल का गठन किया गया है।