हिमालयी क्षेत्रों में बुरांस के पेड़ों को सूखने से बचाएगी नई ततैया, वैज्ञानिकों ने खोजा प्राकृतिक शत्रु

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Solan News: हिमाचल और उत्तराखंड के जंगलों में बुरांस के पेड़ों को सुखा रहे खतरनाक पतंगे से निपटने के लिए वैज्ञानिकों को अहम कामयाबी मिली है। भारतीय प्राणी सर्वेक्षण और पद्मजा नायडू हिमालयी प्राणी उद्यान के वैज्ञानिकों ने दार्जिलिंग में ततैया की नई प्रजाति खोजी है। यह परजीवी ततैया पतंगे के अंडों को पूरी तरह नष्ट कर देती है।

वैज्ञानिकों के अनुसार गैजालिना क्राइसोलोफा पतंगे के अंडों का यह दुनिया में दर्ज पहला प्राकृतिक परजीवी है। दो वर्षों तक चले शोध के बाद सामने आई इस ततैया प्रजाति का नाम टेलेनोमस अल्टिकोलस रखा गया है। इस खोज से हिमालयी राज्यों के महत्वपूर्ण बुरांस और एल्डर जैसे पेड़ों को कीटों के गंभीर प्रकोप से नई सुरक्षा मिलेगी।

पेड़ों की टहनियों और पत्तियों का रस चूस रहा था पतंगा

बायोकंट्रोल साइंस एंड टेक्नोलॉजी में छपे शोध के मुताबिक, सिंगालीला नेशनल पार्क में यह कीट बुरांस के पत्तों और टहनियों का रस चूसकर उन्हें सुखा रहा था। इसके कारण बड़े पैमाने पर वन संपदा को नुकसान हो रहा था। इस नई ततैया की मदद से पर्यावरण, खेती और पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

बुरांस का पेड़ हिमाचल और उत्तराखंड के पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद खास माना जाता है। इससे जूस, चटनी और सिरप जैसे कई उत्पाद बनते हैं। वहीं एल्डर का पेड़ बड़ी इलायची की फसल के लिए जरूरी छाया देता है। यह पतंगा इन दोनों उपयोगी पेड़ों को बहुत तेजी से खत्म कर रहा था।

इंसानों और मवेशियों के लिए भी बड़ा खतरा बना यह कीट

वैज्ञानिकों के अध्ययन में यह भी खुलासा हुआ है कि इस पतंगे की मादा से मनुष्यों में आंखों का गंभीर संक्रमण फैल सकता है। इसके अलावा यदि मवेशी इसे चारे के साथ खा लें, तो दम घुटने से उनकी जान भी जा सकती है। नौणी विश्वविद्यालय के शोध में भी पेड़ सूखने की पुष्टि हुई थी।

भारतीय प्राणी सर्वेक्षण सोलन के प्रभारी डॉ. नवनीत सिंह ने बताया कि यह ततैया कीट के अंडों में अपने अंडे देकर उन्हें खत्म कर देती है। इससे बुरांस के पेड़ों पर मंडरा रहा बड़ा संकट टल जाएगा। इस संयुक्त अध्ययन को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग से पूरा वित्तीय समर्थन मिला था।

Desh Raj
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