Kullu News: हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कसोल में पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील पार्वती घाटी के वन क्षेत्र में कचरा डंप करने का मामला सामने आया है। कुल्लू प्रशासन ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को अपनी स्टेटस रिपोर्ट में बताया कि रंगरी प्लांट से कचरा न उठने की वजह से अस्थायी तौर पर वन भूमि का इस्तेमाल कचरा जमा करने के लिए किया गया था।
एनजीटी को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, 11 जुलाई 2024 को मणिकरण के स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (साडा) की बैठक में वन क्षेत्र में कचरा जमा करने का निर्णय लिया गया था। मनाली के रंगरी स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट द्वारा अचानक जुलाई 2024 में कसोल का कचरा लेने से इनकार करने के बाद यह अस्थायी कदम उठाना पड़ा था।
कुल्लू प्रशासन ने देरी और खराब प्रदर्शन के कारण वेस्ट मैनेजमेंट का काम संभाल रही एजेंसी ‘लक्ष्य टोटल सॉल्यूशंस’ का कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया। इसके बाद एजेंसी को छह महीने के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। वहीं, कसोल में 51 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट में देरी के कारण निर्माण टेंडर को भी रद्द कर दिया गया।
प्रशासन ने अप्रैल 2026 में मणिकरण क्षेत्र के लिए नई व्यवस्था शुरू करते हुए एक एनजीओ, ग्रामीण विकास विभाग और साडा के बीच त्रिपक्षीय समझौता किया। इस नई व्यवस्था के तहत 13 जुलाई 2026 तक 90.46 टन कचरा इकट्ठा किया गया। इसमें से 20 टन गीले कचरे को कम्पोस्ट पिट के जरिए प्रोसेस किया गया और बाकी कचरा रीसायकलर्स को भेजा गया।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वन क्षेत्र की उस अस्थायी डंपिंग साइट को अब पूरी तरह से साफ कर दिया गया है। जून 2025 में एनजीटी ने सोशल मीडिया पर वायरल कचरे के वीडियो का स्वतः संज्ञान लिया था। पार्वती घाटी में पर्यटन सीजन के दौरान भारी संख्या में सैलानियों के पहुंचने से वेस्ट मैनेजमेंट के बुनियादी ढांचे पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।