हिमाचल प्रदेश में खराब मौसम से सेब की फसल को भारी नुकसान, मंडियों में 44 फीसदी कम पहुंची आवक

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश में इस साल खराब मौसम की वजह से सेब के उत्पादन पर बहुत बुरा असर पड़ा है। सेब का सीजन अब अपने आखिरी दौर में है, लेकिन मंडियों में आवक बेहद कम दर्ज की गई है। आवक घटने से इस बार प्रदेश के सेब कारोबार को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

बागवानी विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक 13 सितंबर तक मंडियों में केवल 91.20 लाख पेटी सेब पहुंचा है। पिछले साल इसी दौरान करीब 1.62 करोड़ पेटी सेब की आवक हुई थी। इस तरह इस बार मंडियों में 70.80 लाख पेटी कम सेब आया है, जो पिछले साल के मुकाबले 44 प्रतिशत की बड़ी गिरावट है।

कम और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में सेब के बगीचों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। सर्दियों में बर्फबारी न होने से पेड़ों को जरूरी ठंडक और नमी नहीं मिल सकी। इसके बाद मार्च-अप्रैल में बारिश, बर्फबारी और ओलों की वजह से सेब की फसल खराब हो गई। मौसम के लगातार बदलने से कुल पैदावार काफी कम हो गई।

ऊंचे इलाकों में स्थिति थोड़ी बेहतर है और वहां सेब की तुड़ान अभी जारी है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में मंडियों में सेब की आवक कुछ बढ़ सकती है। आंकड़ों को देखें तो इस बार कुल सेब उत्पादन पिछले 15 सालों के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने का खतरा बना हुआ है।

हिमाचल में साल 2011 के दौरान करीब 1.38 करोड़ पेटी सेब का उत्पादन दर्ज किया गया था। वहीं साल 2010 में रिकॉर्ड 5.11 करोड़ पेटी सेब हुआ था। जबकि पिछले साल यानी 2025 में 3.51 करोड़ पेटी सेब का उत्पादन हुआ था। इसके मुकाबले इस बार आवक बहुत पीछे चल रही है, जिससे कुल पैदावार घटने के आसार हैं।

उत्पादन घटने से बागवानों के साथ परिवहन, पैकेजिंग और आढ़तियों के कारोबार पर बुरा असर पड़ा है। हालांकि, बाजार में सेब के अच्छे दाम मिलने से बागवानों को थोड़ी राहत मिली है। सीजन की शुरुआत में अच्छी क्वालिटी का सेब 5,000 से 5,500 रुपये प्रति पेटी के ऊंचे भाव पर भी बिका है।

फिलहाल ऊंचे इलाकों का बेहतरीन सेब 1,800 से 2,800 रुपये प्रति पेटी बिक रहा है। ठियोग के बागवान महेंद्र वर्मा ने बताया कि फसल काफी कम है, लेकिन बेहतर दामों से नुकसान की भरपाई हो रही है। अब सभी की निगाहें सीजन खत्म होने के बाद आने वाले अंतिम आंकड़ों पर टिकी हुई हैं।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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