Baleswar News: ओडिशा के बालेश्वर में पांच दुर्लभ ओरंगुटान के बच्चों के रेस्क्यू के बाद बड़े अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पश्चिम बंगाल के दीघा स्थित होटल में लाखों रुपये की डील टूटने के बाद इन मासूमों को जंगल में फेंक दिया गया था। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है।
प्राथमिक जांच के मुताबिक तस्कर इन पांचों ओरंगुटान के बच्चों को लेकर दीघा के ग्रैंड हेरिटेज होटल पहुंचे थे। वहां एक खरीदार के साथ गुप्त सौदा होना था। खरीदार के तय समय पर नहीं आने से घबराए तस्कर बच्चों को छोड़कर भाग गए। इसके बाद होटल मालिक और उसके बेटे ने इन्हें ठिकाने लगाने की योजना बनाई।
होटल मालिक जयंत माइती और उसके बेटे सौम्यदीप माइती ने पकड़े जाने के डर से बड़ा कदम उठाया। दोनों ने पांचों बच्चों को अपनी काली थार गाड़ी में लादा। इसके बाद उन्होंने दीघा के पास भोगराई के उदययपुर जंगल में इन जीवों को छोड़ दिया। प्रारंभिक पड़ताल में पता चला कि बाप-बेटे काफी समय से तस्करी से जुड़े हैं।
जांच अधिकारियों के अनुसार इस गिरोह के तार अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी से जुड़े हैं। इस गिरोह के कुछ साथी पहले उत्तर प्रदेश में गिरफ्तार होकर जेल भी जा चुके हैं। अब ओडिशा एसटीएफ और पुलिस की टीमें सिंडिकेट के मुख्य सरगना को पकड़ने के लिए अलग-अलग ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं।
उदययपुर जंगल से बरामदगी के बाद इन सभी नन्हे ओरंगुटान को भुवनेश्वर के नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में भेजा गया। नाजुक हालत को देखते हुए इन्हें पार्क के हैंड रियरिंग सेंटर में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। मैसूर चिड़ियाघर और ओयूएटी के विशेषज्ञों की टेक्निकल कमेटी चौबीसों घंटे इनकी सेहत की निगरानी कर रही है।
विशेषज्ञों की यह टेक्निकल टीम जल्द ही विस्तृत हेल्थ रिपोर्ट जारी करेगी। आमतौर पर ये दुर्लभ ओरंगुटान इंडोनेशिया और मलेशिया के जंगलों में ही मिलते हैं। इनका भारतीय सीमा तक पहुंचना एक बड़े वैश्विक काले बाजार की ओर इशारा करता है। एसटीएफ अब उस रूट और लॉजिस्टिक्स चेन की पड़ताल कर रही है जहां से तस्करी हुई थी।