Shimla News: हिमाचल प्रदेश के श्रम एवं रोजगार विभाग में 13 वर्षों से सेवाएं दे रहे करीब 160 आउटसोर्स डाटा एंट्री ऑपरेटरों पर संकट गहरा गया है। विभाग ने 30 सितंबर को कार्यकाल समाप्त होने के बाद मौखिक आदेश देकर कर्मियों को दफ्तर आने से रोक दिया है। इससे कर्मचारियों की रोजी-रोटी खतरे में आ गई है।
बिना लिखित आदेश काम पर आने से रोकने के निर्देश जारी
विभाग ने सभी जिला अधिकारियों को जुबानी निर्देश देकर ऑपरेटरों को कार्यालय आने से मना कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि कर्मचारियों को कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया। साथ ही यह फरमान भी सुनाया गया है कि दफ्तर पहुंचने पर उन्हें उस दिन का वेतन नहीं मिलेगा।
योजनाएं बंद होने और बजट की कमी का दिया तर्क
निदेशालय के अनुसार सेवा विस्तार की फाइल प्रधान सचिव कार्यालय में लंबित है। विभाग का तर्क है कि कौशल विकास भत्ता योजना 2013 और बेरोजगारी भत्ता योजना 2017 बंद हो चुकी हैं। इन योजनाओं के बंद होने के कारण अब पदों के लिए जरूरी बजट उपलब्ध नहीं है।
कर्मचारी महासंघ ने सरकार के रवैये पर कड़ा रोष जताया
आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष यदोपति चौहान ने सरकार के इस कदम पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्थाई नीति का आश्वासन देते हैं, लेकिन जमीन पर कर्मियों को हटाया जा रहा है। महासंघ ने मुख्यमंत्री से तुरंत हस्तक्षेप कर सेवाकाल बढ़ाने की मांग उठाई है।