जनहित याचिका पर हिमाचल हाईकोर्ट का सख्त रुख, कहा- तकनीकी मामलों में विशेषज्ञ की राय ही अंतिम होगी

Share

- Advertisement -

Shimla News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सड़क निर्माण से जुड़ी एक जनहित याचिका को खारिज करते हुए अहम टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जनहित याचिकाओं में निजी हितों का समावेश नहीं होना चाहिए। कोर्ट तकनीकी मामलों में विशेषज्ञों की राय को बदलकर अपनी राय नहीं थोप सकता।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंदर नेगी की खंडपीठ ने सड़क निर्माण के एलाइनमेंट को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। यह याचिका रोहड़ू के चिड़गांव ब्लॉक की बीडीसी सदस्य इंडिमा देवी ने राज्य सरकार के उस फैसले के खिलाफ दायर की थी।

पुराने मार्ग में भूस्खलन का खतरा, नया रास्ता छोटा और सुरक्षित

याचिकाकर्ता की मांग थी कि सड़क का निर्माण शलावन खड्ड वाले पुराने मार्ग से ही किया जाए। हालांकि मानसून के दौरान पुराना मार्ग अत्यधिक संवेदनशील पाया गया था, जहां मिट्टी धंसने और चट्टानें गिरने का खतरा था। नया मार्ग पुराने से 600 मीटर छोटा और अधिक सुरक्षित है।

नया रास्ता जिस्कून सीनियर सेकेंडरी स्कूल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पंचायत घर और रिहायशी इलाकों को सीधे जोड़ेगा। जबकि पुराने मार्ग पर कोई आबादी नहीं थी। वन, राजस्व और लोक निर्माण विभाग के विशेषज्ञों ने जांच के बाद नए मार्ग को तकनीकी और वित्तीय दृष्टि से सही पाया है।

व्यक्तिगत लाभ के लिए पीआईएल का इस्तेमाल गलत: हाईकोर्ट

अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता की निजी जमीन पुराने मार्ग की तरफ हो सकती है, इसलिए यह याचिका दायर की गई। कोर्ट ने दोहराया कि जनहित याचिका में व्यक्तिगत लाभ की कोई जगह नहीं होती। ऐसे तकनीकी मामलों में अदालतें हस्तक्षेप नहीं कर सकती हैं।

लोक निर्माण विभाग और पर्वतीय सड़क इंजीनियरिंग के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने इस याचिका को सुनवाई के योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने साफ किया कि जनहित के मुखौटे में निजी स्वार्थों को पूरा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

Desh Raj
Desh Raj
Please wait....

Read more

Related News