Sultanpur Lodhi News: पंजाब के जालंधर और कपूरथला जिलों की दो युवतियां ओमान से सुरक्षित भारत लौट आई हैं। उन्हें मस्कट में अच्छी नौकरी का झांसा देकर फंसाया गया था। राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल के गंभीर प्रयासों के बाद दोनों लड़कियों को सकुशल बचाकर वतन लाया गया। दोनों युवतियों ने अपने परिजनों के साथ सुल्तानपुर लोधी पहुंचकर सांसद का धन्यवाद किया।
पीड़ित परिवारों ने सुल्तानपुर लोधी स्थित निर्मल कुटिया पहुंचकर सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल का विशेष आभार जताया। परिजनों ने बताया कि सांसद के हस्तक्षेप के बाद ही उनकी बेटियां घर वापस आ सकीं। इन दोनों मामलों में लड़कियों को विदेश भेजने में महिला ट्रैवल एजेंटों ने ही अहम भूमिका निभाई थी। दोनों परिवारों ने अब इस मामले को लेकर पुलिस में आधिकारिक शिकायत दर्ज करवा दी है।
मस्कट में अभी भी फंसी हैं 130 लड़कियां
युवतियों के अनुसार, एजेंटों ने उन्हें मुंबई एयरपोर्ट के रास्ते मस्कट भेजा था। भारत लौटने के बाद युवतियों ने मीडिया से बात करते हुए एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने दावा किया कि ओमान की राजधानी मस्कट में अभी भी लगभग 130 भारतीय लड़कियां फंसी हुई हैं। वे सभी वतन वापसी का इंतजार कर रही हैं। पीड़ित परिवारों ने पूर्व में सांसद को लिखित अर्जी देकर मदद मांगी थी।
परिजनों ने सांसद को दी गई अपनी शिकायत में गंभीर आरोप लगाए थे। ओमान में लड़कियों के साथ मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और शोषण किया जा रहा था। उन्हें भारत वापस भेजने के बदले मोटी रकम की मांग भी की गई थी। जालंधर की लड़की इसी साल मार्च में मस्कट गई थी। मरियम नामक युवती ने उसे ब्यूटी पार्लर में 25 से 30 हजार रुपये मासिक वेतन का वादा किया था।
मस्कट पहुंचने के बाद उसे पार्लर के बदले गलत काम में धकेलने की कोशिश की गई। जब उसने इसका विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गई और मानसिक तौर पर सताया गया। एजेंटों ने उसका पासपोर्ट भी छीन लिया और उसे जान से मारने की धमकियां दीं। जालंधर के परिवार ने बताया कि लड़की को छोड़ने के बदले उनसे लगातार 20 से 35 हजार रुपये मांगे गए।
बेटी को बचाने के लिए बेची अपनी बाइक
बेटी को सुरक्षित वापस लाने के लिए जालंधर के परिवार को अपनी मोटरसाइकिल तक बेचनी पड़ी। इसके बाद परिवार ने 1 जुलाई को सांसद सीचेवाल के दफ्तर से संपर्क किया। लगातार कानूनी और कूटनीतिक कोशिशों के चलते यह लड़की 7 सितंबर को सुरक्षित घर लौट आई। वहीं, कपूरथला जिले की दूसरी लड़की को उसके गांव की अंजू नामक युवती घरेलू काम का झांसा देकर ओमान ले गई थी।
कपूरथला की लड़की के साथ शुरुआत के दो महीने सब सामान्य रहा, लेकिन बाद में उसकी तबीयत बिगड़ गई। गंभीर बीमारी के बावजूद उसे जरूरी इलाज और दवाइयां नहीं दी गईं। उसे भारत भेजने के बदले परिवार से एक लाख रुपये मांगे गए। परिवार ने अपना मकान गिरवी रखकर एक लाख रुपये दिए, फिर भी उनसे और पैसों की मांग की जाती रही।
कपूरथला के पीड़ित परिवार पर अन्य लड़कियों को भी ओमान भेजने का दबाव बनाया गया। परिवार ने 11 अगस्त को संत सीचेवाल से संपर्क कर गुहार लगाई। उनके प्रयासों से यह लड़की 23 अगस्त को सुरक्षित भारत लौट सकी। सांसद सीचेवाल ने कहा कि नौकरी के नाम पर मानव तस्करी बहुत गंभीर विषय है। परिजनों को विदेश भेजने से पहले वीजा, एजेंट और काम की पूरी जांच करनी चाहिए।
संत सीचेवाल के अनुसार, विदेशों में फंसकर शोषण का शिकार हुईं करीब 190 लड़कियों को अब तक सुरक्षित निकाला जा चुका है।