यूपीआई पर 15 अक्टूबर से लागू होंगे नए एमडीआर नियम, जानिए आम जनता और व्यापारियों पर क्या पड़ेगा प्रभाव

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New Delhi News: देश के सबसे लोकप्रिय डिजिटल भुगतान माध्यम यूपीआई पर 15 अक्टूबर 2026 से नए एमडीआर नियम प्रभावी होने जा रहे हैं। नए प्रावधानों के तहत अधिकतम शुल्क 300 रुपये तक तय किया गया है। इस फैसले के बाद बाजार, व्यापारियों और उपभोक्ताओं के बीच विभिन्न आर्थिक चिंताओं को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

डिजिटल क्रांति ने भारत में रेहड़ी-पटरी से लेकर बड़े मॉल तक भुगतान का तरीका बदला है। अब लोग बटुआ घर छोड़कर सिर्फ मोबाइल फोन लेकर निकलते हैं। नए नियमों के बाद बाजार में असमंजस की स्थिति बन रही है। सरकारी स्तर पर बुनियादी ढांचे के संचालन खर्च का हवाला देकर व्यवस्था को सही ठहराया जा रहा है।

समीक्षकों का मानना है कि आम जनता पहले से ही भारी आयकर और जीएसटी चुका रही है। ऐसे में डिजिटल भुगतान जैसी बुनियादी सुविधा को मुफ्त रखना सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए। डिजिटल लेनदेन बढ़ने से नकदी का चलन काफी कम हुआ है। इससे सरकारी खजाने को नोटों की छपाई में बड़ी राहत मिली है।

नोट छपाई में भारी बचत और जीएसटी संग्रह में उछाल

आरबीआई को हर साल नोट छापने, सिक्के ढालने और कैश वैन चलाने में भारी रकम खर्च करनी पड़ती थी। डिजिटल भुगतान से इस खर्च में हजारों करोड़ रुपये की सीधी बचत हुई है। बाजार पारदर्शी होने से हर महीने जीएसटी संग्रह दो लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े को छू रहा है। इसके बावजूद व्यापारियों पर बोझ डाला जा रहा है।

यदि व्यापारियों ने इस शुल्क से बचने के लिए नकद छूट देनी शुरू कर दी, तो लोग दोबारा नकद भुगतान अपनाने लगेंगे। दुकानदार 2000 रुपये से कम के छोटे बिल बनाकर नियम से बच सकते हैं। मध्यम वर्ग बैंकों से अपनी पूरी सैलरी निकाल सकता है। इससे बैंकों में नकदी की भारी किल्लत पैदा होने का अंदेशा रहेगा।

कैश इकोनॉमी की वापसी और पब्लिक यूटिलिटी का दर्जा

बैंकिंग व्यवस्था में जमा पूंजी कम होने से कर्ज महंगा हो सकता है और अर्थव्यवस्था दोबारा नकदी व्यवस्था की तरफ लौट सकती है। जानकारों का सुझाव है कि यूपीआई को अनिवार्य सरकारी सेवा यानी पब्लिक यूटिलिटी घोषित किया जाए। इससे इस व्यवस्था पर हमेशा के लिए किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क लगाने पर स्थायी रोक लग सकेगी।

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में जनवरी से सितंबर तक डिजिटल पेमेंट नेटवर्क ने रिकॉर्ड 205.24 अरब लेनदेन प्रोसेस किए हैं। सरकार का अनुमान है कि लोगों की आदत बनने के कारण लेनदेन में बड़ी कमी नहीं आएगी। त्योहारी खरीदारी में भी यह प्रणाली सुविधाजनक बनी रहेगी। नए नियमों में एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है।

Right News Desk
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लॉ और पत्रकारिता स्नातक, पत्रकारिता में 11 वर्ष का अनुभव

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