Shimla News: हिमाचल प्रदेश में नशा तस्करी के खिलाफ पीआइटी-एनडीपीएस एक्ट 1988 सबसे बड़ा हथियार बन चुका है। पुलिस अब आदतन तस्करों को तुरंत निवारक हिरासत में भेज रही है। अब तक 174 तस्करों पर कड़ी कार्रवाई हुई है। पुलिस ने 51 करोड़ की संपत्ति भी जब्त की है।
पीआइटी-एनडीपीएस कानून सामान्य एनडीपीएस केस से काफी अलग और सख्त होता है। लगातार अपराध करने वाले और जमानत पर छूटकर दोबारा तस्करी में शामिल होने वाले अपराधियों पर यह कानून लागू होता है। पुख्ता सबूत मिलने पर गृह विभाग की मंजूरी से तस्करों को सीधे जेल भेजा जाता है।
एंटी टास्क फोर्स और डिजिटल जांच से तस्करों पर वार
नशा माफिया की कमर तोड़ने के लिए सरकार ने एंटी टास्क फोर्स का गठन किया है। शिमला, मंडी और कांगड़ा रेंज में तीन विशेष पुलिस थाने बनाए गए हैं। पुलिस अब छोटे तस्करों को पकड़ने के साथ ही बैकवर्ड और फारवर्ड लिंकेज मॉडल के जरिए पूरे गिरोह तक पहुंच रही है।
तस्कर अब दूध के खाली पाउच, माचिस और कुरकुरे के पैकेट में चिट्टा छिपा रहे हैं। वे फोन कॉल की जगह इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए पुलिस ने अपनी डिजिटल फोरेंसिक जांच और तकनीकी निगरानी व्यवस्था को बेहद मजबूत किया है।
हिमाचल के एंटी-चिट्टा मॉडल की राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा
हिमाचल पुलिस आदतन अपराधियों पर संपत्ति जब्ती और वित्तीय जांच का कड़ा शिकंजा कस रही है। इस सफल मॉडल को देखते हुए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने भी हिमाचल के एंटी-चिट्टा मॉडल की पूरी रिपोर्ट मांगी है, ताकि इसे देश के अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सके।
हाल ही में शिमला के बालूगंज थाने में 21 अप्रैल 2026 को नशा तस्करी का मामला दर्ज हुआ था। पुलिस ने तारा देवी रोड पर आरोपी ऋषभ को आठ ग्राम चिट्टे के साथ पकड़ा। इसके बाद 25 अप्रैल को दूसरे आरोपी बादल उर्फ तितला को भी गिरफ्तार किया गया।
छानबीन में खुलासा हुआ कि आरोपी ने नशा बेचकर एक प्लॉट और कार खरीदी थी। पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए जुलाई 2026 में आरोपी की 23.23 लाख रुपये मूल्य की संपत्ति को तुरंत फ्रीज कर दिया। राज्य में पुलिस की इस कार्रवाई से नशा तस्करों में हड़कंप मचा है।