EPF का पैसा निकालकर म्यूचुअल फंड में लगाने की न करें गलती, EPFO ने कर्मचारियों को दी सख्त हिदायत

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Delhi News: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने वेतनभोगी कर्मचारियों को एक महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है। संगठन ने कहा है कि ईपीएफ और म्यूचुअल फंड दोनों के उद्देश्य अलग हैं। इसलिए इन्हें एक-दूसरे का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

ईपीएफओ के अनुसार, सिर्फ अधिक रिटर्न के लालच में पीएफ से पैसा निकालना भविष्य में भारी नुकसान का कारण बन सकता है। ईपीएफ एक सामाजिक सुरक्षा योजना है, जबकि म्यूचुअल फंड केवल निवेश का एक माध्यम है जिसे शेयर बाजार से जोड़ा गया है।

जानिए ईपीएफ और म्यूचुअल फंड के बीच सबसे बड़ा अंतर

ईपीएफ में कर्मचारी के साथ नियोक्ता कंपनी भी हर महीने समान योगदान देती है। इस योजना पर सरकार द्वारा तय ब्याज मिलता है, जिससे स्थिर रिटर्न सुनिश्चित रहता है। दूसरी ओर म्यूचुअल फंड में केवल निवेशक का ही पैसा लगता है और इसका रिटर्न पूरी तरह से बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है।

टैक्स के लिहाज से भी ईपीएफ में तय शर्तों के तहत जमा राशि, ब्याज और निकासी पर छूट का लाभ मिलता है। वहीं म्यूचुअल फंड में निवेश की अवधि और प्रकार के हिसाब से मुनाफा कमाने पर कैपिटल गेन टैक्स देना अनिवार्य होता है।

ईपीएफओ की पेंशन और मुफ्त बीमा सुविधा

ईपीएफ केवल रिटायरमेंट फंड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ईपीएस के तहत पेंशन और ईडीएलआई योजना के तहत 7 लाख रुपये तक का मुफ्त बीमा कवर भी प्रदान करता है। म्यूचुअल फंड में इस प्रकार की कोई सामाजिक सुरक्षा या बीमा लाभ नहीं मिलता।

वित्तीय विशेषज्ञों की सलाह है कि ईपीएफ को अपनी रिटायरमेंट की मजबूत नींव बनाए रखें। जोखिम लेने की क्षमता के अनुसार अपनी अतिरिक्त बचत को ही म्यूचुअल फंड में लगाना बेहतर वित्तीय रणनीति माना जाता है।

Desh Raj
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