Business News: अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान सहित अपने कई प्रमुख व्यापारिक साझेदारों से होने वाले आयात पर 10% से 12.5% के बीच नया टैरिफ लागू करने का फैसला किया है। ये नए शुल्क शुक्रवार सुबह से प्रभावी हो गए हैं। हालांकि, प्रभावी समय से पहले जहाजों पर लादे जा चुके सामानों पर यह शुल्क लागू नहीं होगा।
यह कार्रवाई लगभग 60 अर्थव्यवस्थाओं पर की गई एक जांच के बाद हुई है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ये देश अपनी सप्लाई चेन में जबरन श्रम को रोकने में नाकाम रहे हैं, जिससे अमेरिकी श्रमिकों को नुकसान हुआ है। भारत, मेक्सिको, ब्रिटेन, कनाडा और बांग्लादेश जैसे देशों पर 10% शुल्क लगाया गया है|।
किन देशों पर लगेगा 12.5% टैरिफ और किन्हें मिली राहत
यूरोपीय संघ और ताइवान से आने वाले सामान पर शुल्क 10% से अधिक नहीं होगा, जबकि जापान, स्विट्जरलैंड और दक्षिण कोरिया के उत्पादों पर कम से कम 12.5% टैरिफ लागू होगा|। दर्जनों अन्य देशों पर भी 12.5% का शुल्क लगाया गया है|। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने शुल्कों को रद्द करने के बाद अमेरिका ने यह कदम उठाया है।
भारत के लिए शुरुआती प्रस्ताव में 12.5% शुल्क की बात कही गई थी, लेकिन देश द्वारा व्यापार नीति में किए गए बदलावों के बाद इसे घटाकर 10% कर दिया गया|। हालांकि, ईंधन, खाद्य पदार्थ, उर्वरक, ऑटोमोबाइल, धातु और दवाइयों जैसी आवश्यक वस्तुओं को इस नए टैरिफ के दायरे से बाहर रखा गया है|।
1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत कार्रवाई
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता अभी बनी रहेगी और आने वाले दिनों में और फैसले हो सकते हैं|। यूएसटीआर ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत यह कार्रवाई की है|। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि जबरन मजदूरी पर आयात प्रतिबंध को सख्ती से लागू किया जाएगा|।
भारत और नॉर्वे जैसे देशों ने जबरन श्रम संबंधी आरोपों का खंडन किया है। अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति व्यापार नीति को मजबूत करने के लिए उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों का उपयोग करते रहेंगे और इस नए कदम से अमेरिकी कारोबारियों को संरक्षण मिलेगा|।