New Delhi News: देश में 99.8 फीसदी राशन कार्डों के डिजिटलाइजेशन और 99.3 फीसदी लाभार्थियों की आधार सीडिंग के बाद भी 2.91 करोड़ कार्डों में बड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं। यह बड़ा खुलासा संसद की खाद्य और सार्वजनिक वितरण मामलों की स्थायी समिति की 16वीं रिपोर्ट में हुआ है, जिसे हाल ही में लोकसभा में पेश किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत 20.5 करोड़ राशन कार्ड पूरी तरह डिजिटल हो चुके हैं। इस व्यवस्था से लगभग 80 करोड़ लाभार्थी जुड़े हैं। व्यापक आधार लिंकिंग के कारण डुप्लीकेट, मृत और अपात्र लोगों की पहचान हुई। इससे 6.77 करोड़ फर्जी राशन कार्ड रद्द किए गए, लेकिन डेटा सफाई में 2.91 करोड़ विसंगतियां पाई गईं।
पुराना आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्वर सिस्टम बना बड़ी चुनौती
संसदीय समिति ने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में तेजी से डिजिटलाइजेशन हुआ है। हालांकि कई राज्यों में पुराने सर्वर और सॉफ्टवेयर इस्तेमाल हो रहे हैं। एजेंसियों के बीच सीमित डेटा इंटीग्रेशन और रियल टाइम डेटा एनालिटिक्स की कमी है। इससे राशन वितरण, तकनीकी निगरानी और नीति निर्माण की प्रक्रिया पर बुरा असर पड़ रहा है।
समिति ने सरकार को आधुनिक क्लाउड आधारित आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की सलाह दी है। रिपोर्ट में एक एकीकृत डेटा प्लेटफॉर्म और एआई आधारित विश्लेषण प्रणाली बनाने की जरूरत पर बल दिया गया। इसके अलावा डेटा का नियमित ऑडिट करने और समय समय पर जानकारी अपडेट करने को कहा गया है ताकि व्यवस्था पारदर्शी बन सके।
बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण में बुजुर्गों और दिव्यांगों को परेशानी
संसदीय रिपोर्ट के मुताबिक बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान बुजुर्गों, दिव्यांगों और मेहनतकश लोगों को काफी कठिनाई होती है। कई मामलों में फिंगरप्रिंट का मिलान न होने से पात्र लाभार्थी राशन पाने से वंचित रह जाते हैं। समिति ने इस समस्या के समाधान के लिए फेस ऑथेंटिकेशन जैसे वैकल्पिक पहचान तरीकों को मजबूत करने की सिफारिश की है।
वन नेशन वन राशन कार्ड से प्रवासी मजदूरों को राहत
रिपोर्ट के अनुसार ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ योजना देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हो चुकी है। इस योजना के तहत अब तक 200 करोड़ से अधिक पोर्टेबिलिटी लेनदेन हो चुके हैं। इससे प्रवासी श्रमिकों और दूसरे राज्यों में काम करने वाले पात्र लाभार्थियों को आसानी से राशन की सुविधा मिल रही है।
संसदीय समिति का मानना है कि डिजिटलाइजेशन से राशन वितरण में पारदर्शिता बढ़ी है। इसके बावजूद पीडीएस को त्रुटिरहित बनाने के लिए तकनीकी ढांचे को अधिक मजबूत करना होगा। लाभार्थियों के लिए अधिक सुविधाजनक प्रमाणीकरण प्रणाली विकसित करना आवश्यक है ताकि व्यवस्था को पूरी तरह से सक्षम और सुचारू बनाया जा सके।
