हिमाचल हाईकोर्ट ने रद की भानुपल्ली-रेलवे लाइन भूमि अधिग्रहण समयसीमा, सरकार की लेट-लतीफी पर लगाई रोक

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Bilaspur News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भानुपल्ली-बिलासपुर-बेरी रेलवे लाइन के भूमि अधिग्रहण मामले में राज्य सरकार को झटका दिया है। अदालत ने बिना ठोस लिखित कारणों के अधिग्रहण की समयसीमा बार-बार बढ़ाने की प्रक्रिया को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने सरकार की पुरानी सभी समय विस्तार संबंधी अधिसूचनाओं को पूरी तरह से अवैध ठहराते हुए रद कर दिया है।

न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने कुलदीप ठाकुर और अन्य लोगों की याचिका पर यह निर्णय दिया। यह मामला बिलासपुर जिले की सदर तहसील के उपरी भटेर, बरमाणा और खतेर गांवों से जुड़ा है। इन क्षेत्रों के किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि और आवासीय मकानों को ब्रॉडगेज रेलवे लाइन प्रोजेक्ट के लिए अधिगृहीत किया जा रहा था।

राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण कानून के तहत 29 मार्च 2023 को प्रारंभिक अधिसूचना जारी की थी। नियम के मुताबिक 12 महीने में अंतिम घोषणा जरूरी थी। सरकार इसमें विफल रही और उसने 16 मार्च 2024, 24 मार्च 2025 और 25 मार्च 2026 को समयसीमा बढ़ाई। देरी के पीछे केवल अपरिहार्य प्रशासनिक परिस्थितियों का हवाला दिया गया था।

हाईकोर्ट के निर्देश पर जब सरकारी फाइलें पेश हुईं, तो सरकार ने माना कि विलंब का कोई वास्तविक कारण दर्ज नहीं था। अदालत ने अधिनियम की धारा 19(7) का हवाला देकर स्पष्ट किया कि कारण दर्ज करना, अधिसूचित करना और वेबसाइट पर डालना अनिवार्य है। बिना ठोस वजह प्रशासनिक परिस्थितियों का बहाना बनाकर देरी स्वीकार नहीं की जा सकती।

अदालत ने कहा कि सरकारी लापरवाही की वजह से किसान अपनी जमीन पर कोई नया विकास कार्य नहीं कर पा रहे थे। इसके चलते कोर्ट ने 29 मार्च 2023 की शुरुआती अधिसूचना और बाद की तीनों विस्तार अधिसूचनाओं को रद कर दिया। इस फैसले के बाद प्रभावित किसानों को लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता से राहत मिली है।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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