Jaipur News: एक वरिष्ठ नागरिक महिला ने आयकर विभाग के खिलाफ नौ साल चली कानूनी लड़ाई में बड़ी जीत हासिल की है। आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल जयपुर ने कर अधिकारी द्वारा जोड़े गए 5.15 लाख रुपये की अघोषित आय के आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया।
बिना सबूत आय जोड़ने पर आईटीएटी जयपुर ने दिया फैसला
महिला ने 2007 में दो लाख रुपये की बैंक एफडी कराई थी, जो 2009 में ब्याज सहित मैच्योर हुई। साथ ही पेंशन बचत से नकद जमा कराया था। रिटर्न न भरने पर अधिकारी ने धारा 144 के तहत बेस्ट जजमेंट असेसमेंट कर 5.15 लाख रुपये की कुल अघोषित आय तय कर दी थी।
ट्रिब्यूनल ने सुनवाई के बाद पाया कि एफडी का पैसा महिला का अपना था और नकद जमा के पर्याप्त सबूत मौजूद थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आईटीआर न भरने या नोटिस का जवाब न देने के आधार पर बिना पुख्ता साक्ष्य मनमानी आय नहीं जोड़ी जा सकती।
टैक्स विशेषज्ञों ने सीनियर सिटिजंस को दी जरूरी सलाह
टैक्स एक्सपर्ट विपिन उपाध्याय के अनुसार कर योग्य आय न होने पर भी वरिष्ठ नागरिकों को समय पर आईटीआर जरूर भरना चाहिए। बैंक बड़ी नकदी और एफडी ब्याज की जानकारी सीधे विभाग को भेजते हैं। रिटर्न दाखिल रहने से विभाग की तरफ से असेसमेंट और नोटिस के जोखिम से बचाव होता है।