अस्पतालों में मेडिकल उपकरणों की मनमानी कीमतों पर नकेल कसेगी सरकार, प्राइवेट सेक्टर के साथ बैठकें शुरू

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New Delhi News: निजी अस्पतालों में मेडिकल उपकरणों और कंज्यूमेबल्स की मनमानी कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। सरकार ने इस दिशा में मेडिकल सेक्टर और निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत बातचीत शुरू कर दी है।

हाल ही में महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार कई निजी अस्पताल मरीजों से उपकरणों के नाम पर अत्यधिक कीमत वसूल रहे थे। एफडीए आयुक्त ने एमआरपी और वास्तविक कीमतों के भारी अंतर पर गंभीर सवाल उठाए थे।

संसदीय समिति की सिफारिश और स्वास्थ्य मंत्रालय की पहल

इससे पहले संसद की स्वास्थ्य संबंधी स्थायी समिति ने भी निजी अस्पतालों में इलाज के खर्च की ऊपरी सीमा तय करने की सिफारिश की थी। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने फार्मास्यूटिकल्स विभाग के सचिव के साथ अहम बैठक कर हितधारकों के साथ संवाद स्थापित करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

मुल्तानी फार्मास्युटिकल्स के सीईओ डॉ. विवेक श्रीवास्तव के अनुसार स्वास्थ्य सेवाएं हर नागरिक तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ड्रग प्राइसेस कंट्रोल ऑर्डर के माध्यम से दवाओं को किफायती बनाने की दिशा में काम कर रही है, जिससे आम जनता को इलाज में बड़ी राहत मिल सकेगी।

लागत और एमआरपी में 20 गुना तक का अंतर

एम्स कल्याणी के अध्यक्ष डॉ. वाईके. गुप्ता के अनुसार नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिंस में शामिल दवाएं नियंत्रित दायरे में आती हैं। हालांकि नॉन-शेड्यूल्ड दवाओं, सिरिंज और ग्लव्स जैसे मेडिकल कंज्यूमेबल्स पर प्रभावी नियंत्रण न होने से मरीजों से लागत से 10 से 20 गुना अधिक कीमत वसूली जा रही है।

विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि अस्पतालों को वाजिब मुनाफा कमाने की छूट मिलनी चाहिए, लेकिन अत्यधिक मुनाफाखोरी पूरी तरह अनुचित है। सरकार का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से समझौता किए बिना मरीजों को निजी अस्पतालों के वित्तीय शोषण से बचाना और कीमतों को पारदर्शी बनाना है।

Desh Raj
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