Rasuwa News: नेपाल के रसुवा जिले में त्रिशूली नदी की भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। 26 अगस्त को आई बाढ़ ने 2015 के गोरखा भूकंप से विस्थापित सैकड़ों तमांग परिवारों की बस्तियां उजाड़ दीं। खल्ते, पैरेबेसी और मैलुंग इलाकों में भारी नुकसान हुआ है।
उत्तरगया के शिवालय बेसिक स्कूल में करीब 100 प्रभावित बच्चों ने शरण ली है। इनमें से 60 मासूम ऐसे हैं, जिनके माता-पिता दोनों की मौत हो चुकी है। स्थानीय शिक्षकों के अनुसार विस्थापितों को नदी किनारे बसाने के गलत फैसले के चलते यह भारी जान-माल का नुकसान हुआ है।
दर्जनों स्कूल तबाह और सैकड़ों छात्र अब भी लापता
स्थानीय स्कूल में पढ़ने वाले 550 छात्रों में से लगभग 200 बच्चों से अब तक कोई संपर्क नहीं हो सका है। इसके अलावा चार स्टाफ सदस्य भी लापता बताए जा रहे हैं। इलाके के तीन अन्य स्कूल भी सैलाब में पूरी तरह तबाह हो चुके हैं, जिससे राहत कार्य में मुश्किलें आ रही हैं।
खल्ते क्षेत्र में बाढ़ से पहले कुल 257 मकान मौजूद थे, लेकिन आपदा के बाद एक भी घर सुरक्षित नहीं बचा। उत्तरगया नगर पालिका के प्रतिनिधि पूर्णा बहादुर घाले ने बताया कि उन्होंने सुरक्षित पुनर्वास के लिए कई बार गुहार लगाई थी, मगर प्रशासन ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
2015 के भीषण भूकंप से शुरू हुआ था विस्थापन का दर्द
यह मानवीय संकट 25 अप्रैल 2015 के 7.8 तीव्रता वाले विनाशकारी भूकंप के बाद शुरू हुआ था। उस समय हाकू, गोगने, तिरु और मैलुंग में भारी भूस्खलन हुआ था। वर्ष 2017 के आधिकारिक सर्वे में इन इलाकों को असुरक्षित घोषित कर 113 परिवारों को स्थानांतरित करने की पहचान की गई थी।
विस्थापितों को नदी के किनारे अस्थायी तौर पर बसाया गया, लेकिन यह इलाका भी मानसून में बेहद असुरक्षित साबित हुआ। जुलाई 2025 में भी तिब्बत की ग्लेशियर झील फटने से त्रिशूली नदी में बाढ़ आई थी। लगातार चेतावनियों के बावजूद प्रशासन द्वारा स्थायी पुनर्वास न किए जाने से यह बड़ा हादसा हुआ।