London News: अब कमजोर जीपीएस सिग्नल और नेविगेशन की समस्या जल्द खत्म हो सकती है। वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने ऐसी अत्याधुनिक पोजिशनिंग तकनीक तैयार की है। यह नई प्रणाली सुरंगों, भूमिगत रास्तों और ऊंची इमारतों के बीच भी इंसान या वाहन की बिल्कुल सटीक लोकेशन बताने में पूरी तरह सक्षम है।
क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के नेतृत्व में इस तकनीक को भारत, चीन और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने मिलकर बनाया है। इस प्रणाली का नाम ‘ज्वाइंट डीएएस एंड जीएनएसएस’ (JDG) रखा गया है। स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इसे पहली बार दुनिया के सामने आधिकारिक रूप से पेश किया गया।
फाइबर ऑप्टिक केबल और एआई से मिलेगी सटीक लोकेशन
यह नई तकनीक पारंपरिक सैटेलाइट आधारित जीपीएस सिस्टम पर निर्भर नहीं रहती है। यदि किसी जगह जीपीएस सिग्नल उपलब्ध नहीं होता है, तो यह प्रणाली फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क की मदद लेती है। जमीन में बिछी इंटरनेट केबल के आसपास होने वाले सूक्ष्म कंपनों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल तुरंत पहचानकर सटीक स्थान बताता है।
इस शोध कार्य में भारत की पंडित दीनदयाल एनर्जी यूनिवर्सिटी, चीन की शी आन जियाओतोंग यूनिवर्सिटी और अमेरिकी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अहम भूमिका निभाई है। यह प्रणाली भविष्य में स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन, सेल्फ-ड्राइविंग कारों, आपातकालीन बचाव कार्यों और भूमिगत मेट्रो नेटवर्क में नेविगेशन को पहले से काफी अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित बनाएगी।