Delhi News: अक्सर लोग मानते हैं कि ऑक्सीजन न होने से अंतरिक्ष में बंदूक नहीं चल सकती। हालांकि, यह धारणा पूरी तरह गलत है। आधुनिक बंदूकों के कारतूस में अपना ऑक्सिडाइजर होता है। यह केमिकल बिना बाहरी हवा के भी बारूद को जला देता है। इसलिए अंतरिक्ष में ट्रिगर दबाने पर गोली पूरी रफ्तार से बाहर निकलेगी।
अंतरिक्ष में गोली के सफर का गणित
अंतरिक्ष में निशाना सही लगेगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कहां से फायर कर रहे हैं। यदि आप डीप स्पेस में हैं, तो गुरुत्वाकर्षण और हवा का घर्षण न होने से गोली एकदम सीधी रेखा में जाएगी। वहीं, किसी ग्रह की कक्षा के पास उस ग्रह का गुरुत्वाकर्षण गोली के रास्ते को थोड़ा मोड़ सकता है।
धरती पर हवा के घर्षण के कारण गोली की रफ्तार धीरे-धीरे कम हो जाती है। इसके विपरीत अंतरिक्ष में हवा का ड्रैग पूरी तरह गायब रहता है। धरती पर हवा और गुरुत्वाकर्षण गोली को जल्द ही नीचे गिरा देते हैं। मगर स्पेस में गोली की रफ्तार को रोकने वाली कोई ताकत मौजूद नहीं होती है।
अनंत काल तक सीधी रेखा में सफर
एक बार बंदूक से छूटने के बाद गोली बिना अपनी रफ्तार खोए अरबों सालों तक सीधी रेखा में तैरती रहेगी। यह अनवरत सफर तब तक जारी रहेगा, जब तक वह किसी एस्टेरॉयड या आकाशीय पिंड से न टकराए। टकराने के बाद ही गोली की दिशा या रफ्तार में कोई बदलाव देखने को मिलेगा।
भौतिकी में न्यूटन का तीसरा नियम अंतरिक्ष में भी पूरी तरह लागू होता है। इसके अनुसार हर क्रिया की बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है। जब बंदूक से गोली तेज गति के साथ आगे की ओर निकलती है, तो वह फायर करने वाले व्यक्ति को भी ठीक उतने ही बल से पीछे की तरफ धकेलती है।
