New Delhi News: भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) और भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल (सीईआरटी-इन) ने देश के बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) और फिनटेक कंपनियों को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, साइबर अपराधी अब सिस्टम में सेंध लगाने और मशीन की गति से अनधिकृत वित्तीय लेनदेन करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल कर रहे हैं।
आई4सी की राष्ट्रीय साइबर अपराध खतरा विश्लेषण इकाई (NCTAU) द्वारा जारी संयुक्त परामर्श में कहा गया है कि इन हमलों का मुख्य उद्देश्य त्वरित वित्तीय लाभ कमाना है। हमलावर एआई एजेंटों के जरिए वित्तीय संस्थानों के नेटवर्क में घुसपैठ कर फंड डिस्बर्समेंट सिस्टम और एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (एपीआई) के माध्यम से करोड़ों रुपये के फर्जी लेनदेन को अंजाम दे रहे हैं।
डिजिटल सबूत मिटाकर जांच भटकाने की साजिश
परामर्श में विशेष रूप से आगाह किया गया है कि धोखाधड़ी को अंजाम देने के बाद हमलावर सिस्टम के डिजिटल लॉग और रिकॉर्ड पूरी तरह मिटा देते हैं। इस तरह अपनी पहचान और गतिविधियों को छिपाने से फॉरेंसिक जांच प्रक्रिया अत्यंत जटिल हो जाती है।
एजेंसियों ने पाया है कि साइबर जालसाज वित्तीय संस्थानों के उन सर्वरों और बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं, जहां सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं किए गए हैं या इंटरनेट से जुड़ी प्रणालियों में तकनीकी सेटिंग्स (मिसकंफिगरेशन) कमजोर हैं।
वित्तीय संस्थानों को तत्काल सुरक्षा उपाय लागू करने के निर्देश
आई4सी और सीईआरटी-इन ने सभी बैंकों और वित्तीय सेवा प्रदाताओं को निर्देश दिया है कि वे सुरक्षा खामियों को दूर करने के लिए सीईआरटी-इन द्वारा जारी ‘अति गंभीर श्रेणी’ (Critical Advisories) के सुरक्षा उपायों को तत्काल प्रभाव से लागू करें।
संस्थानों से अपनी आईटी प्रणालियों, एपीआई गेटवे और फंड ट्रांसफर नेटवर्क का तत्काल सुरक्षा ऑडिट करने तथा संदिग्ध गतिविधियों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने को कहा गया है, ताकि एआई-आधारित स्वचालित साइबर हमलों से ग्राहकों के धन और बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।