National News: अमेरिकी आव्रजन नीतियों में सख्ती, तकनीक क्षेत्र में एआई से छंटनी और एच-1बी व ग्रीन कार्ड बैकलॉग की अनिश्चितता के कारण बड़ी संख्या में भारतीय टेक प्रोफेशनल्स स्वदेश लौट रहे हैं। वर्ष 2026 में अब तक 12,900 प्रोफेशनल्स भारत वापस आ चुके हैं। हालांकि, वतन वापसी के बाद उन्हें भारत में वेतन में भारी कटौती की कड़वी सच्चाई का सामना करना पड़ रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की सख्त वीजा नीतियों, एच-1बी और ग्रीन कार्ड बैकलॉग से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच भारतीय टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स तेजी से स्वदेश वापसी कर रहे हैं। तकनीक क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव और वैश्विक छंटनी ने इस रुख को और तेज कर दिया है। हालांकि, अमेरिका से लौटने वाले इन प्रोफेशनल्स को भारत में भारी वेतन कटौती जैसी बड़ी वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्टाफिंग फर्म ‘एक्सफेनो’ (Xpheno) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 में अब तक 12,900 भारतीय प्रोफेशनल्स अमेरिका छोड़कर भारत लौट चुके हैं। इसकी तुलना में वर्ष 2025 में पूरे साल के दौरान 15,100 टेक प्रोफेशनल्स वापस आए थे। मौजूदा रुझान को देखते हुए इस साल यह संख्या पिछले रिकॉर्ड को पार कर सकती है।
अमेरिका जाने वालों की संख्या में आई भारी कमी
रिपोर्ट के अनुसार, भारत से अमेरिका जाने वाले पेशेवरों की संख्या में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में 21,200 भारतीय अमेरिका गए थे, जबकि 2026 में अब तक यह संख्या सिमटकर मात्र 14,800 रह गई है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो भारत से अमेरिका जाने वालों के मुकाबले वहां से लौटने वालों का आंकड़ा अधिक हो जाएगा।
एक्सफेनो के सह-संस्थापक कमल करंथ ने इस स्थिति पर कहा कि एच-1बी, पीईआरएम (PERM) और ओपीटी (OPT) जैसे कार्यक्रमों से जुड़ी प्रशासनिक व नीतिगत जटिलताओं के कारण यह ट्रेंड निकट भविष्य में भी बना रहेगा। उन्होंने संभावना जताई कि भारत-अमेरिका टैलेंट कॉरिडोर में पहली बार ‘नेट पॉजिटिव’ स्थिति बन सकती है, जहां अमेरिका से आने वाले टैलेंट की संख्या वहां जाने वालों की तुलना में अधिक होगी।
टैलेंट का रिवर्सल नहीं, बल्कि बाजार की रीबैलेंसिंग
टीमलीज डिजिटल की सीईओ नीति शर्मा का मानना है कि इसे टैलेंट का पूर्ण रिवर्सल नहीं कहा जा सकता, क्योंकि आवाजाही दोनों दिशाओं में जारी रहेगी। उनके अनुसार, यह बाजार का एक क्रमिक संतुलन (रीबैलेंसिंग) है। भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) का तेजी से विस्तार हो रहा है। ये केंद्र अब प्रोडक्ट ओनरशिप, एआई डेवलपमेंट और ग्लोबल टेक्नोलॉजी मैंडेट पर काम कर रहे हैं, जिससे अनुभवी पेशेवरों को भारत में करियर बनाने के मजबूत विकल्प मिल रहे हैं।
भारतीय आईटी उद्योग पर प्रभाव और स्थानीय प्रतिस्पर्धा
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव भारतीय आईटी सेक्टर के लिए एक सकारात्मक संकेत है। विकसित अमेरिकी बाजार का कार्य अनुभव लेकर लौटने वाले पेशेवर नए टेक स्टैक, एडवांस फ्रेमवर्क और उन्नत कार्यशैली साथ ला रहे हैं, जिससे स्थानीय उद्योग और अधिक परिष्कृत होगा।
हालांकि, इसका दूसरा पहलू यह है कि घरेलू बाजार में स्थानीय टैलेंट के लिए प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ रही है। विशेषकर मिड और सीनियर लेवल पदों पर यह प्रभाव साफ दिख रहा है। कंपनियां अब केवल अंतरराष्ट्रीय अनुभव के आधार पर चयन नहीं कर रही हैं, बल्कि उम्मीदवारों की विशिष्ट तकनीकी दक्षता और प्रासंगिक कार्य अनुभव को ही प्राथमिकता दे रही हैं।