National News: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने डिजिटल सत्यापन को बढ़ावा देते हुए 300 निजी व सार्वजनिक संगठनों को अपने ऑफलाइन वेरिफिकेशन सिस्टम में शामिल किया है। इससे होटल चेक-इन, अस्पताल में भर्ती और गिग वर्कर वेरिफिकेशन जैसी सेवाओं में कागजी फोटोकॉपी की जगह सुरक्षित व सहमति-आधारित डिजिटल पहचान सत्यापन संभव होगा।
होटल में चेक-इन करना हो, अस्पताल में भर्ती होना हो या गिग वर्कर की पहचान सत्यापित करनी हो, अब नागरिकों को पहचान पत्र की भौतिक फोटोकॉपी देने की निर्भरता समाप्त होने जा रही है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने अपनी डिजिटल प्रणाली को मजबूत करते हुए 300 संगठनों को अपने ऑफलाइन वेरिफिकेशन सिस्टम में शामिल कर लिया है। इस कदम से रोजमर्रा की नागरिक व उपभोक्ता सेवाओं में सहमति-आधारित डिजिटल सत्यापन का दायरा काफी बढ़ गया है।
यह विस्तार ऐसे समय में प्रभावी हुआ है जब आधिकारिक मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इस ऐप के लगभग 7.5 करोड़ डाउनलोड दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि 86 लाख से अधिक नागरिक आधार सेवा केंद्र जाए बिना सीधे ऐप के माध्यम से अपना पंजीकृत मोबाइल नंबर अपडेट कर चुके हैं।
300 संस्थाएं ऑफलाइन वेरिफिकेशन सीकिंग एंटिटीज के रूप में पंजीकृत
प्राधिकरण ने इन 300 संस्थाओं को ऑफलाइन वेरिफिकेशन सीकिंग एंटिटीज (OVSEs) के तौर पर पंजीकृत किया है। इनमें मुख्य रूप से हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर, शिक्षा, इवेंट मैनेजमेंट, गिग इकॉनमी और सामान्य उपभोक्ता सेवाओं से जुड़े क्षेत्र शामिल हैं। पिछले वर्ष अप्रैल में UIDAI ने शुरुआती चरण में 100 संस्थाओं को इस नेटवर्क से जोड़ा था, जिसे अब व्यापक विस्तार दिया गया है।
इस नई व्यवस्था का प्राथमिक उद्देश्य कागजी दस्तावेजों के संग्रह को बंद कर पूर्णतः सुरक्षित डिजिटल प्रक्रिया अपनाना है। इससे न केवल अनावश्यक कागजी कार्रवाई में कमी आएगी, बल्कि संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा के लीक होने अथवा दुरुपयोग का जोखिम भी पूरी तरह नियंत्रित होगा।
डेटा सुरक्षा और गोपनीयता पर विशेष जोर
इस प्रणाली के अंतर्गत नागरिक अपनी स्पष्ट सहमति के उपरांत ऐप के जरिए पहचान से जुड़े आवश्यक विवरण साझा कर सकेंगे। उपयोगकर्ताओं के पास यह विकल्प होगा कि वे पूरी जानकारी साझा करना चाहते हैं या केवल आवश्यक विवरण। इस प्रक्रिया की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पहचान सत्यापन के दौरान संबंधित संगठन को नागरिक की 12 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या नहीं भेजी जाती है। इसके अलावा, सत्यापनकर्ता संगठन को UIDAI के केंद्रीय डेटाबेस से सीधे जुड़ने की भी आवश्यकता नहीं होती।
प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, ऐप का उपयोग व्यक्तिगत जानकारी अपडेट करने के लिए भी व्यापक स्तर पर हुआ है। नागरिकों ने इसके माध्यम से 22.16 लाख बार पते में संशोधन और 40.25 लाख बार ईमेल आईडी अपडेट की है।
बायोमेट्रिक सुरक्षा फीचर्स का भी बढ़ा उपयोग
डेटा गोपनीयता और सुरक्षा की दृष्टि से ऐप के इनबिल्ट फीचर्स का व्यापक इस्तेमाल देखा गया है। ऐप पर अब तक 4.6 करोड़ बार बायोमेट्रिक लॉक और अनलॉक प्रक्रियाएं दर्ज की गई हैं, जिससे उपयोगकर्ता अपनी फिंगरप्रिंट और आइरिस आधारित प्रमाणीकरण प्रणाली पर सीधा नियंत्रण रख पाते हैं। साथ ही 3.61 लाख बार डिजिटल लॉक और अनलॉक ट्रांजैक्शन भी दर्ज किए गए हैं।
UIDAI ने स्पष्ट किया है कि यह पहल डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के नियमों और प्रावधानों के पूरी तरह अनुकूल है, जो उपयोगकर्ता की सहमति और न्यूनतम डेटा संग्रह पर बल देते हैं। इससे आम नागरिकों को स्मार्टफोन के जरिए सुरक्षित व सुगम डिजिटल सेवाएं उपलब्ध होंगी।