Birbhum News: पश्चिम बंगाल पुलिस ने बीरभूम जिले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कम से कम 20 करोड़ रुपये नकद और 15 किलोग्राम सोना जब्त किया है। अर्पिता मुखर्जी के ठिकानों पर हुई ईडी की छापेमारी के बाद यह राज्य में सबसे बड़ी बरामदगी में से एक है।
पुलिस ने देवचा गांव में स्थित पत्थर व्यापारी मीनार मंडल के दो मंजिला मकान पर यह कार्रवाई की। तलाशी के दौरान एक-एक किलोग्राम की 14 सोने की छड़ें और 100-100 ग्राम के 10 बिस्कुट मिले हैं। इनकी वर्तमान बाजार दर लगभग 21.5 करोड़ रुपये आंकी गई है।
अधिकारियों ने बताया कि कई थैलों में भरकर रखी गई नकदी की गिनती अभी भी जारी है। गिनती का यह आंकड़ा 20 करोड़ रुपये को पार कर चुका है। मीनार मंडल फरार कारोबारी टुल्लू मंडल उर्फ मोहम्मद नजीबुद्दीन का रिश्तेदार बताया जा रहा है।
अवैध खनन और राजस्व चोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
यह जब्ती बीरभूम में अवैध खनन और राजस्व चोरी के खिलाफ चल रहे बड़े अभियान का हिस्सा है। टुल्लू मंडल का बीरभूम के पत्थर खनन व्यवसाय में बड़ा दबदबा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उसे बालू माफिया का प्रमुख संचालक करार दिया है।
मीनार मंडल पहले नॉर्थ बंगाल स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन में बस ड्राइवर के पद पर तैनात था। कुछ साल पहले वह नौकरी छोड़कर रिश्तेदार के पत्थर कारोबार में आ गया था। वह पत्थर खदानों के ट्रक पास करने वाले टोल गेट से राजस्व वसूलता था।
तलाशी अभियान के दौरान पुलिस ने मीनार और उसके बेटे को मौके से हिरासत में ले लिया। पुलिस दोनों से पूछताछ कर रही है, ताकि नकदी छिपाने के अन्य संभावित ठिकानों का पता लगाया जा सके। उस पर राजस्व में भारी धोखाधड़ी का आरोप है।
कारोबारी टुल्लू का आपराधिक इतिहास और राजनीतिक कनेक्शन
कारोबारी टुल्लू का नाम करोड़ों रुपये के मवेशी तस्करी मामले में सीबीआई जांच के दौरान सामने आया था। ईडी ने उसे दिल्ली तलब किया था, जिसके बाद बीरभूम पुलिस ने उसे हत्या के मामले में गिरफ्तार कर लिया था। जमानत मिलने के बाद से वह गायब है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि उनकी सरकार आने के बाद अवैध खनन पर रोक लगी है। पहले खदानों से प्रतिमाह 35-40 लाख रुपये मिलते थे, जबकि हाल ही में एक महीने में 83 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व संग्रह दर्ज किया गया है।
मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराते हुए पुलिस टीम की सराहना की। वहीं, विपक्षी टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने सरकार से मांग की कि ऐसे अपराधियों को संरक्षण देने वाले नेताओं की भी गहराई से जांच की जानी चाहिए।