Delhi News: हिंदू धर्म में भगवान श्री हरि विष्णु के दशावतारों का विशेष धार्मिक महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, भाद्रपद शुक्ल द्वादशी को भगवान विष्णु ने पांचवें अवतार के रूप में वामन रूप धारण किया था। पूरे देश में यह पावन पर्व वामन जयंती या वामन द्वादशी के रूप में श्रद्धा से मनाया जाता है।
वामन अवतार की पौराणिक कथा और तीन पग भूमि
पौराणिक कथा के अनुसार, दैत्यराज बलि द्वारा देवों को पराजित करने पर माता अदिति ने ऋषि कश्यप के कहने पर पयोव्रत किया था। इसके बाद भगवान विष्णु ने बटुक ब्राह्मण रूप में अवतार लिया। समस्त ऋषियों ने उनका उपनयन संस्कार कर यज्ञोपवीत, मृगचर्म, पलाश दण्ड और अन्य पूजन सामग्री भेंट की थी।
इसके बाद वामन देव नर्मदा तट पर राजा बलि के यज्ञ में पहुंचे और भिक्षा में तीन पग भूमि मांगी। शुक्राचार्य के मना करने के बाद भी बलि ने संकल्प लिया। प्रभु ने दो पग में स्वर्ग और पृथ्वी नाप लिए, जिसके बाद बलि ने तीसरा पग रखने के लिए अपना शीश आगे कर दिया।
वामन जयंती 2026 तिथि, मुहूर्त और पूजन विधि
पंचांग गणना के अनुसार वर्ष 2026 में वामन जयंती 23 सितंबर को मनाई जा रही है। भाद्रपद शुक्ल द्वादशी तिथि 22 सितंबर की रात 09:43 बजे शुरू होकर 23 सितंबर की रात 10:50 बजे समाप्त होगी। इसके साथ ही श्रवण नक्षत्र का शुभ संयोग 23 सितंबर की सुबह 09:09 बजे तक रहेगा।
इस पावन दिन पूर्वमुखी होकर हरे वस्त्र पर वामन देव का चित्र स्थापित करें। कांसे के दीये में गोघृत का दीपक जलाएं, तुलसी पत्र, चंदन, मौसमी और मिश्री का भोग लगाएं। रुद्राक्ष माला से ‘ॐ तप रूपाय विद्महे श्रृष्टिकर्ताय धीमहि तन्नो वामन प्रचोदयात्’ मंत्र का जाप करें। तांबा, चांदी, चावल और दही का दान अत्यंत लाभकारी माना जाता है।