हिमाचल राजनीति: वरिष्ठ कांग्रेस नेता कौल सिंह ठाकुर के राजनीतिक सफर और बयानों की पूरी कहानी

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता ठाकुर कौल सिंह अपनी लंबी राजनीतिक पारी और बयानों को लेकर चर्चा में हैं। आठ बार विधायक और चार बार मंत्री रहे कौल सिंह चुनावी राजनीति छोड़ने और आलाकमान के निर्देश पर लड़ने के विरोधाभासी बयानों से सुखियों में हैं।

चुनावी संन्यास की बात और मंडी में बदला रुख

साल 2011 में धर्मशाला शीतकालीन सत्र के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने अस्वस्थ कौल सिंह से फोन पर हाल-चाल पूछा था। हाल ही में रामपाल आश्रम में कौल सिंह ने आठ बार विधायक, चार बार मंत्री और दो बार अध्यक्ष रहने का हवाला देकर नई पीढ़ी के लिए रास्ता छोड़ने की घोषणा की थी।

रामपाल आश्रम वाले वीडियो के बाद माना गया कि वह वरिष्ठ नेताओं को संदेश दे रहे हैं। लेकिन मंडी पहुंचते ही उन्होंने नया रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वह चुनावी राजनीति से संन्यास ले चुके हैं, पर अगर आलाकमान कहेगा तो वह दोबारा चुनाव लड़ लेंगे।

बयानों में बदलाव और जी-23 विवाद का सच

कौल सिंह का यह अप्रत्याशित रुख पहले भी देखा गया है। पार्टी के ‘जी 23’ पत्र पर हस्ताक्षर करने के बाद उन्होंने सफाई दी थी। उन्होंने आलाकमान से कहा कि उन्हें लगा यह पार्टी मेंबरशिप का कागज है और गलती से उनसे हस्ताक्षर करवा लिए गए थे।

उन्होंने 2017 और 2022 दोनों विधानसभा चुनावों में कहा था कि यह उनका अंतिम चुनाव है। लेकिन अब वह फिर से आलाकमान की इच्छा पर चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं। कौल सिंह उन उम्रदराज नेताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं जो नए दौर को स्वीकार नहीं कर पा रहे।

शिष्यों से मिली हार और मुख्यमंत्री पद की दावेदारी

कौल सिंह को 2017 में उनके शिष्य रहे जवाहर ठाकुर और 2022 में दूसरे शिष्य पूर्ण ठाकुर ने चुनाव हराया। 2022 चुनाव से पहले उन्होंने खुद को मुख्यमंत्री पद का सबसे वरिष्ठ दावेदार बताया था, लेकिन वह चुनाव हार गए। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भी अक्सर उन पर तंज कसते थे।

उनकी बेटी चंपा ठाकुर मंडी जिला कांग्रेस की अध्यक्ष हैं, जिन्हें हालिया स्थानीय निकाय चुनाव में हार मिली। वर्ष 2025-26 में कौल सिंह अपनी ही सरकार में उपेक्षा की शिकायत करने लगे। उन्होंने कहा कि उनके सिफारिशी पत्र (डीओ) गुम हो जाते हैं और शिक्षकों का मनचाहा समायोजन नहीं हो पाता।

81 वर्ष की उम्र में भी राजनीति में सक्रियता

कौल सिंह अपनी जनता के सामने मलाल जताते हैं कि अगर वह जीतते तो मुख्यमंत्री बनते। 81 वर्ष की उम्र में भी वह खुद को ‘किसी भी जवान से अधिक जवान’ बताते हैं। वह खुद को वीरभद्र सिंह के बाद प्रदेश का सबसे वरिष्ठ कांग्रेस नेता मानते हैं।

राजनीति में उनके अनुभव का इस्तेमाल कैसे हो, यह पार्टी को तय करना है। उनकी तीसरी पीढ़ी भी राजनीति के लिए तैयार दिख रही है। इसके साथ ही यह भी विचारणीय है कि कुर्सी पर मौजूद उम्रदराज नेताओं से प्रदेश को कितना फायदा मिल रहा है।

Right News Desk
Right News Desk
लॉ और पत्रकारिता स्नातक, पत्रकारिता में 11 वर्ष का अनुभव

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