Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के उद्योगों को बड़ी राहत देते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मिलने वाले सहमति प्रमाण पत्र नियमों में बड़ा बदलाव किया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बताया कि अब पंजीकृत उद्योगों को एक बार प्रमाण पत्र जारी होगा, जिसकी वैधता उद्योग श्रेणी के अनुसार 5 से 25 साल तक रहेगी।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बताया कि प्रदेश में करीब 12,500 उद्योग प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पंजीकृत हैं। इन उद्योगों को पहले बार-बार सहमति प्रमाण पत्र का नवीनीकरण कराना पड़ता था। अब इस नई प्रक्रिया से कारोबार करना बहुत आसान होगा। राज्य में व्यापार को गति देने के लिए सरकार ने यह अहम कदम उठाया है।
कारोबार सुगमता के लिए लागू हुई नई व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने ‘स्पीड ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को मजबूत करने के लिए यह फैसला लिया है। अब उद्यमियों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। बोर्ड ने अपने निचले कार्यालयों को भी इसके लिए जरूरी अधिकार दे दिए हैं, जिससे काम जल्दी होगा।
पहले छोटी गलतियों की वजह से कई बार फैक्ट्रियों की बिजली कट जाती थी, जिससे उत्पादन काफी प्रभावित होता था। नई व्यवस्था लागू होने से अब उद्योगों को ऐसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके अलावा सहमति प्रमाण पत्र जारी करने की समय सीमा भी श्रेणी के आधार पर तय कर दी गई है।
अधिकारियों की जवाबदेही तय और लिपिकीय कार्य में कमी
यदि तय समय सीमा के अंदर प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही तय होगी। सरकार नए निवेश को आकर्षित करने के लिए नियमों को लगातार आसान बना रही है। स्थानीय स्तर पर तुरंत फैसले लेने के लिए क्षेत्रीय अधिकारियों को वित्तीय और नियामक अधिकार भी सौंपे गए हैं।
दावा है कि ऐसी व्यवस्था लागू करने वाला हिमाचल देश का पहला राज्य बना है। ऑनलाइन सिस्टम सुधरने से बोर्ड का 70 फीसदी क्लर्क वाला काम कम होगा। बचा हुआ स्टाफ दूसरे महत्वपूर्ण कामों में लगेगा। इससे उद्योगों से जुड़े लंबित मामलों का तेजी से निपटारा हो सकेगा और कारोबारियों का समय बचेगा।