Parenting Advice: छोटे बच्चों को घर में पढ़ाना कई बार माता-पिता के लिए बेहद मुश्किल काम बन जाता है। पढ़ाई और होमवर्क का नाम सुनते ही बच्चे रोने लगते हैं या भाग जाते हैं। ऐसे में पेरेंट्स का गुस्सा होना स्वाभाविक है, लेकिन डांट-डपट से समस्या हल होने के बजाय और बिगड़ जाती है।
चिल्लाने के बजाय दिमाग को दें सही ‘चिंगारी’
पैरेंटिंग कोच डॉक्टर खुशबू के अनुसार, बच्चे आलसी नहीं होते बल्कि उनका दिमाग एक ठंडे इंजन की तरह होता है। जैसे किसी पुराने वाहन को स्टार्ट करने के लिए किक या चोक की जरूरत होती है, ठीक वैसे ही बच्चे के दिमाग को एक छोटी सी शुरुआत यानी ‘चिंगारी’ चाहिए होती है। चिल्लाने से बच्चा डर जाता है, पढ़ाई में उसका मन नहीं लगता।
आजमाएं 5 मिनट का यह जादुई फॉर्मूला
बच्चों से कभी भी लंबे समय तक पढ़ने का दबाव न बनाएं। उनसे केवल इतना कहें कि ‘बस 5 मिनट बैठकर 5 सवाल हल कर लो, फिर जो मन करे वो करना।’ जब बच्चा एक बार एकाग्र होकर बैठ जाता है, तो वह आसानी से 20 से 25 मिनट तक अपना पूरा काम खत्म कर लेता है।
गलती करने का डर निकालें और जज न करें
अक्सर बच्चे पढ़ाई से नहीं, बल्कि गलतियों पर मिलने वाली डांट से डरते हैं। उन्हें महसूस होता है कि पेरेंट्स उन्हें जज करेंगे। इसलिए होमवर्क शुरू कराते समय बच्चे को भरोसा दिलाएं कि गलती होने पर आप उसे समझाएंगे। बिना जज किए सहयोग देने से बच्चा बिना किसी डर के रोज मन लगाकर पढ़ाई करेगा।