Sirmaur News: सिरमौर जिले की प्रमुख नकदी फसल अदरक पर एक बार फिर गंभीर बीमारी का खतरा मंडराने लगा है। संगड़ाह उपमंडल के बाउनल काकोग, माईना, रजाना और उगर गांवों में अदरक के पत्ते पीले पड़ने लगे हैं। सूचना मिलते ही कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने काकोग गांव पहुंचकर फसल का मुआयना किया।
खेतों में फाइलोस्टिक्टा ब्लाइट का प्रकोप बढ़ा
कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं और कृषि विभाग नाहन के अधिकारियों ने जांच में पाया कि अदरक की फसल फाइलोस्टिक्टा ब्लाइट की चपेट में आ चुकी है। वैज्ञानिकों ने मौके पर स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने किसानों को फसल को बड़े नुकसान से बचाने के लिए तुरंत प्रभाव से जरूरी प्रबंधन उपाय अपनाने के निर्देश दिए।
कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं के सह निदेशक डॉ. पंकज मित्तल ने बताया कि लगातार बारिश और अधिक नमी से यह बीमारी तेजी से फैलती है। शुरुआत में पत्तियों पर छोटे गोल और भूरे धब्बे बनते हैं, जो बाद में फैलकर पूरी पत्ती को सुखा देते हैं। इससे पौधों की बढ़वार और कंद के विकास पर बुरा असर पड़ता है।
किसानों को खेतों में जलभराव रोकने के निर्देश
वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में पानी जमा न होने दें और जल निकासी का पुख्ता प्रबंध करें। इसके अलावा रोगग्रस्त पत्तियों और अवशेषों को उखाड़कर नष्ट करें। विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया कि विभिन्न प्रभाव समूह वाली अनुमोदित दवाओं का कृषि सलाह और लेबल के अनुसार ही छिड़काव करें।
जिले में सालाना 16 हजार मीट्रिक टन अदरक पैदावार
सिरमौर जिले में सालाना 15 से 16 हजार मीट्रिक टन अदरक का उत्पादन होता है। यहां कुल 1,960 हेक्टेयर भूमि पर अदरक की खेती की जाती है, जिसमें 1,249 हेक्टेयर असिंचित और 711 हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र है। इन दिनों मंडियों में अदरक 50 से 80 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रहा है।
वहीं खुदरा बाजारों में अदरक 100 से 150 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। जिले में अदरक से तैयार होने वाली पारंपरिक सौंठ को हाल ही में जीआई टैग भी मिला है। बाजार में इन दिनों सौंठ का भाव 40 से 50 हजार रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है, जिससे किसानों की आजीविका जुड़ी है।