Mandi News: हिमाचल प्रदेश के आईआईटी मंडी में जन्माष्टमी के मौके पर लगाए गए एक पोस्टर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस पोस्टर में वर्ण व्यवस्था के तहत शूद्रों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। मामला सामने आने पर संस्थान प्रशासन ने तुरंत जांच कमेटी का गठन कर दिया है।
विवादित पोस्टर संस्थान के ऑडिटोरियम के मुख्य द्वार पर छात्रों द्वारा लगाया गया था। इसका शीर्षक ‘भगवद्गीता – द टाइमलेस विजडम’ रखा गया था। पोस्टर में चारों वर्गों ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र की भूमिकाएं बताई गई थीं। इसमें शूद्रों का काम केवल उच्च वर्गों की सेवा करना लिखा गया था, जिससे विवाद गहरा गया।
पोस्टर में ब्राह्मणों को ईश्वर का संदेशवाहक, क्षत्रियों को रक्षक और वैश्यों को अर्थव्यवस्था चलाने वाला बताया गया। साथ ही भगवद्गीता के दो श्लोक भी लिखे गए थे। संस्थान ने साफ किया कि यह उनका आधिकारिक कार्यक्रम नहीं था। इसे छात्रों ने आयोजित किया था और संस्थान ने इसे कोई प्रायोजन या समर्थन नहीं दिया था।
जांच कमेटी यह पता लगाएगी कि पोस्टर किसने बनाया और इसे लगाने की इजाजत किसने दी थी। कमेटी में फैकल्टी सदस्यों के अलावा अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। संस्थान के रजिस्ट्रार डॉ. केएस पांडेय ने कहा कि संस्थान इस तरह की गतिविधियों का बिल्कुल समर्थन नहीं करता है।
निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा कि कुछ छात्रों ने भगवद्गीता की अपने तरीके से व्याख्या की है। उन्होंने कहा कि संस्थान समानता, सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों के लिए प्रतिबद्ध है। प्रो. बेहरा पहले भी मांस न खाने की अपील और प्राकृतिक आपदाओं को पशु क्रूरता से जोड़ने जैसे बयानों को लेकर चर्चा में रहे हैं।
आईआईटी मंडी के निदेशक पद पर नियुक्ति के बाद उनका एक भूत-प्रेत भगाने वाला वीडियो भी सामने आया था। प्रो. बेहरा का इस्कॉन से गहरा नाता है और वह 27 वर्षों से युवाओं को गीता के मूल्य सिखा रहे हैं। संस्थान में भगवद्गीता पर तीन क्रेडिट का एक कोर्स भी पढ़ाया जाता है। जांच रिपोर्ट के बाद आगे कार्रवाई होगी।