Mandi News: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों तक उद्यमिता और तकनीकी सुविधाओं का विस्तार करने जा रहा है। संस्थान की योजना प्रदेश के सभी 12 जिलों में 36 प्री-रूरल इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित करने की है। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को अपने व्यावसायिक विचारों को स्टार्टअप में बदलने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और पूरा सहयोग प्रदान किया जाएगा।
700 करोड़ रुपये के विकास कार्यों से सुधरेगी आधारभूत संरचना
आईआईटी मंडी में आधारभूत ढांचे के विस्तार के साथ कैंपस को सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। संस्थान में लगभग 700 करोड़ रुपये के विभिन्न इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट प्रगति पर हैं, जिनके पूरा होने से शैक्षणिक, आवासीय और अन्य सुविधाओं का दायरा बढ़ेगा। कैंपस में आपदा-प्रतिरोधी आधारभूत ढांचे के विकास पर करीब 67 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके अलावा, उत्तर और दक्षिण कैंपस को आपस में जोड़ने के लिए 22 करोड़ रुपये की लागत से 3.6 किलोमीटर लंबी डबल-लेन सड़क और 50 मीटर का पुल तैयार कर लिया गया है, जबकि 70 मीटर लंबे एक अन्य पुल का निर्माण कार्य भी तेजी से जारी है।
छात्रों की संख्या में वृद्धि और तकनीकी शोध
पिछले साढ़े चार वर्षों के दौरान संस्थान में हिमाचली विद्यार्थियों की संख्या में 3.6 गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साथ ही, संस्थान में कार्यरत कुल कर्मचारियों में करीब 92 प्रतिशत लोग हिमाचल प्रदेश के ही निवासी हैं। संस्थान ने आपदाओं के अलावा पहाड़ी क्षेत्रों की कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रिसिजन फार्मिंग एडवाइजरी और जलवायु नियंत्रित खेती पर भी विशेष शोध कार्य शुरू किए हैं। भूस्खलन और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए विभिन्न शोध परियोजनाओं के तहत करोड़ों रुपये के फंड का उपयोग किया जा रहा है, जिससे प्रदेश के तकनीकी विकास को नई दिशा मिल रही है।