Jaipur News: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में प्रतिनियुक्ति पर जाने को लेकर राजस्थान कैडर के युवा आईपीएस अधिकारियों में उत्साह नहीं दिख रहा है। सीबीआई द्वारा एसपी स्तर के दो पदों के लिए पैनल मांगे जाने पर 2016 से 2020 बैच के 30 से अधिक अधिकारियों में से किसी ने आवेदन नहीं किया, जिससे पुलिस मुख्यालय के सामने संकट खड़ा हो गया है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर जाकर सेवाएं देने को लेकर राजस्थान कैडर के युवा आईपीएस अधिकारियों का रुझान घटता नजर आ रहा है। हालात यह हैं कि सीबीआई द्वारा राजस्थान से पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्तर के दो अधिकारियों का पैनल मांगे जाने के बावजूद एक भी आईपीएस अधिकारी ने इसके लिए अपनी सहमति या आवेदन नहीं दिया। संबंधित बैचों में राज्य के 30 से अधिक आईपीएस अधिकारी कार्यरत हैं, लेकिन किसी ने भी केंद्रीय जांच एजेंसी का रुख करने में रुचि नहीं दिखाई है। इसके चलते राजस्थान पुलिस मुख्यालय के समक्ष केंद्र को पैनल भेजने की गंभीर प्रशासनिक चुनौती उत्पन्न हो गई है।
सीबीआई ने राजस्थान कैडर से एसपी स्तर के दो अधिकारियों की सेवाएं लेने के लिए पुलिस मुख्यालय से पैनल की मांग की थी। इसके लिए वर्ष 2016 से 2020 बैच के अधिकारियों को पात्रता के दायरे में शामिल किया गया था। इस मांग के आधार पर राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने सितंबर महीने में संबंधित बैच के अधिकारियों से औपचारिक आवेदन आमंत्रित किए थे। तय समय-सीमा बीत जाने के बाद भी जब किसी अधिकारी ने आवेदन नहीं किया, तो पुलिस महकमे में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को लेकर बदलती प्राथमिकताओं पर चर्चा शुरू हो गई।
जिले की कप्तानी को प्राथमिकता दे रहे युवा आईपीएस
आईपीएस अधिकारियों की इस बेरुखी के पीछे अपने गृह कैडर में ही जिला पुलिस अधीक्षक के पद पर बने रहने या नियुक्ति पाने की प्रबल इच्छा को मुख्य कारण माना जा रहा है। युवा अधिकारी राजस्थान के भीतर ही जिला पुलिस की कमान संभालना अधिक पसंद कर रहे हैं। एसपी स्तर के अधिकारियों के करियर में जिले का नेतृत्व करना बेहद अहम पड़ाव माना जाता है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिसिंग की जिम्मेदारी मिलती है।
सीबीआई जैसी शीर्ष केंद्रीय एजेंसी में गंभीर वित्तीय और अंतरराज्यीय अपराधों की जांच का बहुमूल्य अनुभव मिलता है। इसके बावजूद राजस्थान के युवा अधिकारियों की पहली पसंद फील्ड पोस्टिंग बनी हुई है। अब पुलिस मुख्यालय के सामने यह असमंजस है कि इच्छुक अधिकारियों की कमी के बीच सीबीआई की मांग के अनुरूप दो अधिकारियों का पैनल किस प्रकार तैयार कर भेजा जाए।