Shimla News: हिमाचल प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने प्रदेश भर की वंचित दलित बस्तियों को बुनियादी सुविधाएं दिलाने के लिए कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने सभी जिला उपायुक्तों को निर्देश जारी कर बिजली और एंबुलेंस योग्य सड़क से महरूम अनुसूचित जाति बस्तियों की तत्काल पहचान करने और सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
बुनियादी सुविधाओं से वंचित बस्तियों की होगी पहचान
आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री कुलदीप कुमार ने जिला स्तर पर व्यापक और समयबद्ध अभियान चलाने के आदेश दिए हैं। इस अभियान का मुख्य मकसद उन बस्तियों को चिह्नित करना है, जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। इसके अलावा उन गांवों की सूची भी बनेगी, जहां आपातकालीन वाहनों या एंबुलेंस के आने-जाने के लिए मोटर योग्य पक्की सड़क नहीं है।
अध्यक्ष कुलदीप कुमार ने कहा कि बस्तियों में आवश्यक सुविधाओं, खासकर सड़क और बिजली का न होना एक गंभीर चिंता का विषय है। ऐसी स्थिति में जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को जमीनी स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। इसके साथ ही स्थिति की वास्तविक पड़ताल कर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाना बेहद जरूरी है, ताकि लोगों को राहत मिले।
अधिकारियों को फील्ड में उतरकर सत्यापन करने के निर्देश
उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि वे एसडीएम, बीडीओ और ग्राम पंचायत स्तर के अधिकारियों की टीम बनाकर जरूरी आंकड़े जुटाएं। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि सर्वे के दौरान कोई भी पात्र बस्ती छूटने न पाए। सभी अधिकारी मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करेंगे और जमीनी हकीकत की जांच के बाद ही अंतिम सूची तैयार करेंगे।
जिला रिपोर्ट में गांव, पंचायत, ब्लॉक और एससी आबादी के ब्योरे के साथ सुविधा न मिलने के स्पष्ट कारण भी दर्ज करने होंगे। इसके अलावा मौजूदा स्थिति, विभाग द्वारा उठाए गए कदम और काम पूरा करने की प्रस्तावित समय-सीमा भी बतानी होगी। आयोग ने साफ कहा है कि पत्र मिलने के सात दिनों के भीतर प्रमाणित रिपोर्ट अनिवार्य रूप से भेजनी होगी।