हिमाचल प्रदेश में मछुआरा सम्मान निधि योजना बनी आर्थिक सहारा, ऑफ सीजन में पात्र परिवारों को मिल रहे 3500 रुपये

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Bilaspur News: हिमाचल प्रदेश में जलाशयों पर आश्रित मछुआरा परिवारों को ऑफ सीजन के दौरान आर्थिक संकट से उबारने के लिए राज्य सरकार ने मछुआरा सम्मान निधि योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत 15 जून से 15 अगस्त तक मछली पकड़ने पर लगे प्रतिबंध के समय पात्र परिवारों को वित्तीय मदद दी जा रही है।

प्रदेश में हर साल 15 जून से 15 अगस्त तक मछलियों के संरक्षण और प्रजनन के लिए मत्स्य आखेट पर पूरी तरह रोक रहती है। इस अवधि में आजीविका के लिए पूरी तरह मत्स्य पालन पर निर्भर रहने वाले परिवारों के पास आय का कोई स्थायी जरिया नहीं होता।

मछुआरा परिवारों की इसी समस्या को देखते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार ने प्रत्येक पात्र मछुआरा परिवार को 3,500 रुपये की सम्मान राहत राशि देना शुरू किया है। यह सहायता राशि दो महीने के प्रतिबंध के दौरान परिवारों की जरूरी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने में काफी मददगार साबित हो रही है।

सरकार की इस पहल से राज्य भर के हजारों परिवारों को राहत मिली है। अकेले बिलासपुर जिले के 1,500 मछुआरा परिवारों को 52 लाख रुपये से अधिक की राशि बांटी गई है। गोबिंदसागर झील और अन्य जलाशयों पर निर्भर समुदाय के लिए यह योजना आर्थिक सुरक्षा का बड़ा आधार बनी है।

यह योजना वित्तीय मदद के साथ मछुआरों के श्रम और योगदान के सम्मान का प्रतीक भी है। पहली बार ऑफ सीजन में सीधी सरकारी सहायता मिलने से मछुआरा समाज में खुशी है। इसके अलावा सरकार की ओर से रॉयल्टी दर में कटौती से भी समुदाय को अतिरिक्त फायदा पहुंचा है।

नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने बताया, “मछली पकडऩे पर प्रतिबंध पर्यावरण संरक्षण और मत्स्य संवर्धन के लिए जरूरी है, लेकिन इस दौरान परिवारों की आजीविका सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। मछुआरा सम्मान निधि योजना पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक सुरक्षा के संतुलन का सफल उदाहरण है।”

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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