Shimla News: भारी कर्ज और बढ़ते प्रशासनिक खर्च से जूझ रही हिमाचल प्रदेश सरकार अब नौकरशाही का आकार छोटा करने की योजना बना रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों के स्वीकृत पदों को घटाने के लिए जल्द ही केंद्र सरकार को औपचारिक प्रस्ताव भेजेगी।
राज्य सरकार के अनुसार, वर्तमान में बड़े कैडर को मेंटेन करने पर हर साल लगभग 200 करोड़ रुपये का भारी-भरकम खर्च आता है। हिमाचल पर पहले से ही एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है। वित्तीय संकट से निपटने और फालतू खर्चों पर लगाम लगाने के लिए सरकार अब यह बड़ा कदम उठाने जा रही है।
आईएएस कैडर में 23 पद घटाने की योजना
प्रस्ताव के अनुसार, प्रदेश में आईएएस अधिकारियों की स्वीकृत संख्या 153 से घटाकर 130 की जाएगी। मुख्यमंत्री सुक्खू का मानना है कि इस संख्या को 100 से 110 के बीच होना चाहिए। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों की संभावित नाराजगी को ध्यान में रखते हुए फिलहाल 23 पद कम करने की सिफारिश केंद्र से की जाएगी।
आईएफएस और आईपीएस के पदों में भी कमी
सरकार भारतीय वन सेवा यानी आईएफएस कैडर में भी 35 पद घटाने का मन बना चुकी है। वर्तमान में राज्य में आईएफएस के 118 स्वीकृत पद हैं, जिन्हें घटाकर 83 किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, राज्य में मौजूद 96 आईपीएस पदों की संख्या को भी जरूरत के हिसाब से रीस्ट्रक्चर कर कम किया जाएगा।
कम और जवाबदेह अफसरों की जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश को बहुत बड़ी नौकरशाही की जरूरत नहीं है। सरकार केवल उन्हीं अधिकारियों को रखना चाहती है, जो जनकल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर गंभीरता से लागू कर सकें। कई अफसरों के पास पर्याप्त काम नहीं है, इसलिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए अब तेजी से एनओसी जारी कर उन्हें रिलीव किया जा रहा है।
एक अधिकारी पर सालाना 50 लाख खर्च
वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, एक अफसर की सैलरी, सपोर्ट स्टाफ, वाहन और आवास जैसी सुविधाओं पर सालाना 50 लाख रुपये से ज्यादा खर्च होता है। कैडर का आकार घटाने से सरकारी खजाने की बड़ी बचत होगी। कार्मिक विभाग जल्द ही इस पूरे प्लान का आधिकारिक ड्राफ्ट तैयार कर केंद्र को भेजेगा।
निचले स्तर पर कर्मियों की कमी से परेशानी
प्रस्ताव में यह दलील भी दी जाएगी कि वन विभाग जैसे अहम विभागों में उच्च पदों पर भारी भरकम ढांचा है, जबकि फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों की भारी कमी है। इस असंतुलन को ठीक करने और उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग करने के लिए सरकार कैडर साइज को व्यावहारिक बनाना चाहती है।
