Shimla News: हिमाचल प्रदेश में पट्टे पर दी गई जमीनों का मालिकाना हक पाने का इंतजार कर रहे हजारों किसानों और बागवानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार ने राजस्व विभाग की लेटलतीफी और फाइलों को लंबित रखने की व्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाया है।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पात्र मामलों का इंतकाल (म्यूटेशन) तय समय सीमा में पूरा किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर किसी अधिकारी ने जानबूझकर देरी की या टालमटोल की, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राजस्व मंत्री ने सुनी किसानों की शिकायतें, दिए त्वरित कार्रवाई के आदेश
सचिवालय में भुट्टी, थानाधार और कोटगढ़ क्षेत्रों से पहुंचे किसानों की समस्याएं सुनने के बाद राजस्व मंत्री ने निर्देश जारी किए। कई परिवार पिछले 50 वर्षों से जमीन पर खेती कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक कानूनी हक नहीं मिला है। मंत्री ने उप तहसील कोटगढ़ के अधिकारियों को जल्द इंतकाल निपटाने के आदेश दिए।
राजस्व मंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा वास्तविक कब्जा धारकों को जल्द मालिकाना हक दिलाने की है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोटगढ़ के लोगों को पट्टे से जुड़े रिकॉर्ड लेने के लिए रामपुर न जाना पड़े। सभी जरूरी दस्तावेज स्थानीय राजस्व कार्यालयों में ही उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
जबरन दबाव बनाने पर रोक और लंबित मामलों का स्थायी समाधान
जनसुनवाई के दौरान मैलन गांव के रतन चंद ने 1974 से लंबित 3 बीघा जमीन के इंतकाल का मुद्दा उठाया। मंत्री के हस्तक्षेप के बाद सोमवार को उनकी प्रक्रिया पूरी होगी। साथ ही मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी किसान पर सड़क निर्माण के लिए जबरन शपथ पत्र देने का दबाव न बनाया जाए।
सरकार दस्तावेजों की जांच कर पात्र किसानों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कर रही है। इस कदम का उद्देश्य दशकों से काबिज लाभार्थियों को वैधानिक मालिकाना हक दिलाकर मामलों का स्थायी समाधान करना है। सख्त निर्देशों से उम्मीद है कि अटके हुए हजारों इंतकाल जल्द पूरे होंगे।