Mandi News: हिमाचल प्रदेश में मानसूनी बाढ़ से राष्ट्रीय राजमार्गों और बस्तियों को होने वाले भारी नुकसान को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने मेगा प्लान बनाया है। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में ब्यास और रावी नदियों में वैज्ञानिक ड्रेजिंग और सुरक्षा उपायों पर अहम सहमति बनी है।
दिल्ली में हुई इस त्रि-स्तरीय समन्वय बैठक में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री भी शामिल हुए। इसका मुख्य उद्देश्य अंतर-मंत्रालयी रुकावटों को खत्म करके जमीनी स्तर पर प्रोजेक्ट्स को गति देना है। अब नदियों में जमा भारी सिल्ट निकालने के काम को बिना किसी प्रशासनिक देरी के तेजी से पूरा किया जाएगा।
ब्यास नदी के किनारे 66 संवेदनशील स्थल चिन्हित
विगत तीन वर्षों में ब्यास नदी ने अपना रुख बदलकर कीरतपुर-मनाली फोरलेन को कई स्थानों पर भारी नुकसान पहुंचाया था। तलहटी में बोल्डर और मलबा जमा होने से नदी की जलधारण क्षमता घटी है। खतरे को देखते हुए एनएचएआई और प्रशासन ने मंडी से मनाली तक 66 अति संवेदनशील प्वाइंट्स की पहचान की है।
सड़क कनेक्टिविटी टूटने और जान-माल के जोखिम को रोकने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को 243.37 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट सौंपी गई है। एनएचएआई मंडी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर वरुण चारी ने बताया कि आधुनिक ड्रेजिंग से नदी गहरी होगी, जिससे फोरलेन और रिहायशी बस्तियों का कटाव पूरी तरह रुक सकेगा।
रावी के उफान से चंबा हाईवे को बड़ा खतरा
चंबा जिले की लाइफलाइन कहे जाने वाले नेशनल हाईवे 154ए पर रावी नदी का उफान लगातार तबाही मचा रहा है। पिछले साल बाढ़ के कारण सड़क धंसने से मणिमहेश यात्रा कई दिनों तक ठप रही थी। हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स के पानी से हो रहे कटाव को रोकने के लिए नदी की तुरंत वैज्ञानिक डी-सिल्टिंग होगी।
नदियों से मलबा हटाने के लिए वन मंजूरी जैसी कानूनी अड़चनों को दूर करने की तैयारी है। पर्यावरण मंत्रालय अब ड्रेजिंग को सामान्य खनन के बजाय ईको-रिस्टोरेशन और क्लाइमेट रेजिलिएंस का दर्जा देने पर विचार कर रहा है। जलशक्ति मंत्रालय की निगरानी में मलबे के निस्तारण और उपयोग के लिए एक स्थायी एसओपी भी बनेगी।