Delhi News: फेफड़ों का कैंसर अब केवल स्मोकिंग करने वालों तक सीमित नहीं रहा। हाल के सालों में ऐसे लोगों में भी यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है, जिन्होंने कभी सिगरेट या तंबाकू नहीं पिया। विशेषज्ञों के मुताबिक वायु प्रदूषण, घरेलू प्रदूषक और आनुवंशिक कारण इस बदलाव की सबसे प्रमुख वजह बनकर उभरे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार फेफड़े होना ही इस बीमारी की सबसे बड़ी वजह है, सिर्फ धूम्रपान ही अकेला कारण नहीं है। यही कारण है कि गैर-धूम्रपान करने वाले लोगों को भी शुरुआती लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और सही परामर्श से गंभीर खतरे से बचा जा सकता है।
भारत में तेजी से बढ़ रहे गैर-धूम्रपान करने वाले मरीज
दुनिया भर में फेफड़ों के कैंसर के 10 से 25 प्रतिशत मामले बिना धूम्रपान करने वालों में मिलते हैं। वहीं भारत में यह आंकड़ा बढ़कर 30 से 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है। पहले यह बीमारी अधिक उम्र के पुरुषों में दिखती थी, लेकिन अब युवा वयस्कों और महिलाओं में एडेनोकार्सिनोमा प्रकार का कैंसर तेजी से सामने आ रहा है।
वायु प्रदूषण और घरेलू कारक बढ़ा रहे बीमारी का खतरा
पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक के चेस्ट फिजिशियन डॉ. महावीर मोदी के अनुसार वाहनों का धुआं, औद्योगिक प्रदूषण और सूक्ष्म कण (PM2.5) फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा सेकंड हैंड स्मोक, रेडॉन गैस और बिना वेंटिलेशन के ठोस ईंधन से खाना पकाने के दौरान निकलने वाला धुआं भी कैंसर का कारण बन सकता है।
जीन म्यूटेशन भी बन रहा बीमारी की मुख्य वजह
गुरुग्राम के CK बिड़ला अस्पताल के डॉ. पुष्पिंदर गुलिया बताते हैं कि गैर-धूम्रपान करने वालों में यह बीमारी जैविक रूप से अलग होती है। इनमें अक्सर EGFR या ALK जीन में बदलाव मिलते हैं। आधुनिक मॉलिक्यूलर टेस्टिंग से इनकी पहचान कर टार्गेटेड थेरेपी दी जा सकती है, जो कीमोथेरेपी से अधिक प्रभावी और कम नुकसानदेह होती है।
इन शुरुआती लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
गैर-धूम्रपान करने वाले लोग अक्सर खुद को सुरक्षित मानकर शुरुआती लक्षणों को सामान्य खांसी, अस्थमा या टीबी समझ लेते हैं। अगर तीन हफ्ते से अधिक समय तक बढ़ती हुई खांसी, सांस फूलना, बलगम में खून आना, सीने या पीठ में दर्द, बार-बार निमोनिया होना या बिना कारण वजन घटने लगे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
प्रदूषण से बचाव और जरूरी सावधानियां
डब्ल्यूएचओ और आईएआरसी ने बाहरी वायु प्रदूषण और PM2.5 कणों को कैंसर पैदा करने वाले प्रमुख कारणों में शामिल किया है। प्रदूषण फेफड़ों की निष्क्रिय म्यूटेटेड कोशिकाओं को सक्रिय कर देता है। बचाव के लिए अधिक प्रदूषण में N95 मास्क पहनें, घर में वेंटिलेशन रखें, एयर प्यूरीफायर चलाएं और तीन सप्ताह से अधिक पुरानी खांसी में जांच कराएं।